बिहार में आज पांच सीटों के लिए शुरू हुए राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा में मतदान केंद्र बनाया गया है, जहां विधायकों ने अपने मत का प्रयोग करना शुरू कर दिया है. वोटिंग शाम 5 बजे तक चलेगी. मतदान समाप्त होने बाद शाम में मतगणना होगी. खबर है कि कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास और सुरेंद्र प्रसाद का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है और उनके सरकारी आवास पर सन्नाटा पसरा हुआ है. प्रदेश अध्यक्ष और गठबंधन के रणनीतिकार दोनों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है. चर्चा है कि ये दोनों विधायक एनडीए के पक्ष में 'क्रॉस वोटिंग' कर सकते हैं.
कौन हैं ये दो विधायक, जिनसे डरी है कांग्रेस?
मनोज विश्वास: फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं. मूल रूप से आरजेडी से कांग्रेस में आए थे. केवट जाति से आते हैं और इनका पुराना रिश्ता जेडीयू से रहा है. राजनीति की शुरुआत इन्होंने जदयू से ही की थी.
सुरेंद्र प्रसाद: पहली बार बाल्मीकिनगर से चुनाव जीतकर विधायक बने हैं. कुशवाहा जाति के बड़े चेहरे और दिग्गज कारोबारी हैं. लव-कुश बस सर्विस और रेलवे ठेकों के मालिक हैं. उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाते हैं. 2015 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़े थे लेकिन जीत नही सके थे.
एनडीए का दावा बनाम तेजस्वी का दांव
एनडीए ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार की जीत का जीत को लेकर भारी आत्मविश्वास दिखाया है. पांचवें प्रत्याशी शिवेश राम ने विधानसभा में प्रवेश करते ही 'विक्ट्री साइन' दिखाया और कहा कि जीत हमारी सुनिश्चित है. विपक्ष के दावे खोखले हैं क्योंकि उनके अपने विधायक ही उनके साथ नहीं हैं. हमारे गठबंधन में पूरी एकता है.
वहीं पर तेजस्वी प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव ने एडी सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. एनडीए का आरोप है कि अगर विपक्ष को अपनी जीत पर इतना ही भरोसा था, तो उन्होंने विधायकों को होटल में 'कैद' क्यों कर रखा है?
अगर ये दो विधायक पाला बदलते हैं तो आरजेडी के उम्मीदवार एडी सिंह की राह मुश्किल हो सकती है. शाम को मतगणना के बाद ही साफ होगा कि बिहार की राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहा.
बिहार में आज पांच सीटों के लिए शुरू हुए राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा में मतदान केंद्र बनाया गया है, जहां विधायकों ने अपने मत का प्रयोग करना शुरू कर दिया है. वोटिंग शाम 5 बजे तक चलेगी. मतदान समाप्त होने बाद शाम में मतगणना होगी. खबर है कि कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास और सुरेंद्र प्रसाद का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है और उनके सरकारी आवास पर सन्नाटा पसरा हुआ है. प्रदेश अध्यक्ष और गठबंधन के रणनीतिकार दोनों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है. चर्चा है कि ये दोनों विधायक एनडीए के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ कर सकते हैं.
कौन हैं ये दो विधायक, जिनसे डरी है कांग्रेस?
मनोज विश्वास: फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं. मूल रूप से आरजेडी से कांग्रेस में आए थे. केवट जाति से आते हैं और इनका पुराना रिश्ता जेडीयू से रहा है. राजनीति की शुरुआत इन्होंने जदयू से ही की थी.
सुरेंद्र प्रसाद: पहली बार बाल्मीकिनगर से चुनाव जीतकर विधायक बने हैं. कुशवाहा जाति के बड़े चेहरे और दिग्गज कारोबारी हैं. लव-कुश बस सर्विस और रेलवे ठेकों के मालिक हैं. उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाते हैं. 2015 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से विधानसभा का चुनाव लड़े थे लेकिन जीत नही सके थे.
एनडीए का दावा बनाम तेजस्वी का दांव
एनडीए ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार की जीत का जीत को लेकर भारी आत्मविश्वास दिखाया है. पांचवें प्रत्याशी शिवेश राम ने विधानसभा में प्रवेश करते ही ‘विक्ट्री साइन’ दिखाया और कहा कि जीत हमारी सुनिश्चित है. विपक्ष के दावे खोखले हैं क्योंकि उनके अपने विधायक ही उनके साथ नहीं हैं. हमारे गठबंधन में पूरी एकता है.
वहीं पर तेजस्वी प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव ने एडी सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. एनडीए का आरोप है कि अगर विपक्ष को अपनी जीत पर इतना ही भरोसा था, तो उन्होंने विधायकों को होटल में ‘कैद’ क्यों कर रखा है?
अगर ये दो विधायक पाला बदलते हैं तो आरजेडी के उम्मीदवार एडी सिंह की राह मुश्किल हो सकती है. शाम को मतगणना के बाद ही साफ होगा कि बिहार की राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहा.