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राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर में आई भीषण आंधी ने देश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा क्षेत्रों में भारी तबाही मचा दी. जिस रेगिस्तान को भारत की ‘सोलर कैपिटल’ कहा जाता है, वहां हजारों सोलर पैनल टूटकर जमीन पर बिखर गए. कई जगह पैनल अपनी जगह से उखड़कर दूर-दूर तक जा गिरे. जैसलमेर में स्थित 1.3 गीगावॉट क्षमता वाले विशाल सोलर प्लांट, जो करीब 5 लाख परिवारों को बिजली उपलब्ध कराता है, उसे भी आंधी ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है. इसके अलावा कई अन्य बड़े सोलर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं.
उधर, तूफानी आंधी ने बिजली व्यवस्था की भी कमर तोड़ दी. शाम 7 बजे से रात 9:30 बजे तक चली तेज हवाओं और बारिश के चलते जिलेभर में 400 से अधिक बिजली के पोल धराशायी हो गए. कई स्थानों पर तारें टूट गईं और विद्युत उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए. सम, खुईयाला, सियांबर, पिथला, पोलजी डेयरी और डीकेडी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे. कोठरी जीएसएस को भी भारी नुकसान पहुंचा है. नतीजा यह रहा कि जैसलमेर और सम पंचायत समिति क्षेत्र के करीब 150 गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई.
13 घंटे से ज्यादा समय से अंधेरे में डूबे ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है. जोधपुर डिस्कॉम की टीमें युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है. राजस्थान में ग्रीन एनर्जी के सबसे बड़े केंद्र पर आई यह प्राकृतिक मार न सिर्फ करोड़ों रुपये के नुकसान की कहानी है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या भविष्य में ऐसे बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स को चरम मौसम की चुनौतियों के लिए और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है?
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