kj.srivatsan
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राजस्थान में परीक्षाओं की शुचिता पर फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है. 5 दिन के भीतर ही सीकर और दौसा में परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है. कहानी सिर्फ इतनी नहीं कि छात्र नकल करते पकड़े गए. आरोप तो ये भी है कि परीक्षा केंद्र पर मौजूद गुरुजी ही छात्रों को नकल करवा रहे थे और वो भी ऊपर से मिले आदेश का हवाला देकर. वैसे यह वही सीकर है जहां से इस साल नीट के पर्चे लीक का मामला भी सबसे पहले दर्ज कराया गया था. फिलहाल इन दोनों सेंटर्स पर हुई परीक्षा को रद्द कर दिया गया है.
सीकर के विश्वभारती कॉलेज और दौसा जिले के लालसौट में संस्कृत विश्वविद्यालय की PGDCA परीक्षा का में छात्रों को नकल कराने का मामला सामने आया है. यहां तीन कमरों में 72 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे. लेकिन यहां पर किस तरह परीक्षा चल रही थीवो सामने आई इन तस्वीरों के जरिए आप खुद ही समझ लीजिए. विजिलेंस टीम ने जैसे ही अचानक छापा मारा, परीक्षा का पूरा सच सामने आ गया. छात्रों के पास प्रिंटेड कागजों से नकल का सामान मिला और कई छात्र खुलेआम उसका इस्तेमाल करते दिखाई दिए.

विजिलेंस टीम के छापे में सामने आया कि छात्र प्रिंटेड सामग्री से नकल कर रहे थे. तीन कमरों में कुल 72 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे और टीम को यहां सामूहिक नकल की शिकायत नहीं, बल्कि उसके सबूत मिले. सबसे गंभीर सवाल अब परीक्षा देने वाले छात्रों से ज्यादा परीक्षा केंद्र की व्यवस्था पर है. आखिर इतनी बड़ी संख्या में छात्र नकल की सामग्री लेकर परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंच गए?
अगर आरोप सही हैं कि केंद्र पर मौजूद शिक्षक ही नकल कराने में मदद कर रहे थे, तो फिर ये सिर्फ छात्रों की गलती नहीं. बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का सवाल है. खास बात ये है कि पांच दिन के भीतर नकल का ये दूसरा बड़ा मामला सामने आया है. इससे पहले 7 अगस्त को लालसोट के एमडी पीजी कॉलेज में भी PGDCA परीक्षा के दौरान नकल का मामला सामने आया था. वहां भी धड़ल्ले से नकल चल रही थी और परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थी सरकार के कम्यूटर अनुदेशक पद की योग्यता के लिए यहां आए थे. ऐसे में विपक्ष भी अब सवाल उठने लगा है.

टीकाराम जुली, अभी तो डबल इंजन की सरकार में दो जगह ही नल की तस्वीर सामने आई है ना जाने ऐसी कितनी जगह है जहां धड़ल्ले से सामूहिक नकल करवाई जा रही है. आज छात्र देश भर में इसे रोकने के लिए ही तो आंदोलन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री जी को जवाब देना चाहिए की नकल माफिया इतने बेख़ौफ़ कैसे हैं! यूपी-बिहार के लिए जो सुनते थे उस खराब हालत राजस्थान की कर दी. जो मेहनत करते हुए बच्चे कहां जाएंगे?
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा और परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंभुकुमार झा ने विश्वभारती कॉलेज में हुई परीक्षा को निरस्त कर दिया है. साथ ही परीक्षा केंद्र को सस्पेंड करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
दरअसल, यह पूरा मामला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि साल 2019 जून साल 2024 तक अकेले जयपुर की राजस्थान यूनिवर्सिटी में साल 2019 में 1000 परीक्षाथी, साल 2020 में 430 परीक्षार्थी साल 2021 में 351 परीक्षार्थी, साल 2022 में 820 परीक्षाथियों को, साल 2023 में 1011 परीक्षाथियों और साल 2024 में 536 परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े गए. इसी तरह बांसवाड़ा के गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय में साल 2023 में 26 परीक्षार्थियों को नकल करते पकड़ा गया हालांकि हरदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में साल 2024 में नकल का केवल एक, कोटा विश्वविद्यालय में 2019 से 2023 तक करीब 550 परीक्षार्थियों को नकल करते पकड़ा गया. जबकि कानून की पढ़ाई कराने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय में जून 2024 तक 300 से भी अधिक नकल के मामले पकड़े गए. अलग-अलग यूनिवर्सिटी में नकल के 7,000 मामले तो साल 2024 तक के आंकड़े से सरकार ने विधानसभा में रखे हैं. इसके बाद के मामले अभी बताए ही नहीं गए हैं.

बहरहाल, एक तरफ सरकार और विश्वविद्यालय नकल रोकने के लिए सख्ती के दावे करते हैं दूसरी तरफ परीक्षा केंद्रों से सामने आती ये तस्वीरें उन दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं. क्योंकि सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है, सवाल राजस्थान के उस भविष्य का है, जिसकी नींव अगर नकल से रखी जाएगी तो उसकी इमारत कितनी मजबूत होगी?
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