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Rajasthan Congress: केंद्र सरकार ने जब से जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है तब से विरोधियों पार्टियों ने इसका समर्थन तो किया ही। साथ ही इस निर्णय के पीछे खुद ही पार्टी का हाथ बताया। अब राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी इस पर बयान दिया है। गहलोत ने जातिगत जनगणना को जरूरी बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आरक्षण पर 50% की सीमा का जो राइडर है, उसे हटाया जाए।
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बंगलौर में कांग्रेस की ओबीसी काउंसिल की बैठक हुई जिसमें अशोक गहलोत शामिल हुए थे। वहां से जयपुर लौटने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि बैठक में समुदाय को सामाजिक न्याय दिलाने की परिकल्पना की गई है। कहा कि राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी इसे सिद्धांततः स्वीकार किया है। हमारी मांग है कि यह जनगणना सोशल-इकोनॉमिक सर्वे के साथ की जाए, ताकि हर गरीब—चाहे वह एससी, एसटी, ओबीसी हो या ews हो, उसे उसका हक मिल सके।
गहलोत ने कहा कि बैठक में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आरक्षण की नीति को और सशक्त बनाने के सुझाव शामिल हैं, ताकि सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत किया जा सके। साथ ही सरकार से यह भी अपील की गई है कि वह राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं और जातिगत आंकड़ों को सार्वजनिक कर लोकतांत्रिक भागीदारी को सुनिश्चित करें।
गत मई में एक कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा देश की प्रगति और पिछड़ी जातियों, दलितों और आदिवासियों की तरक्की में बाधा बन रही है। हम चाहते हैं कि यह सीमा हटाकर समुदायों की बाधा को समाप्त किया जाए।
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