राजनीति में किस्मत, मेहनत और सही समय पर सही नेतृत्व का साथ मिलना कितना जरूरी है, यह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी के सफर से साफ झलकता है. न्यूज 24 की जानी-मानी पत्रकार और एंकर मीना शर्मा के साथ एक विशेष बातचीत में नीरज डांगी ने न सिर्फ अपनी राजनीतिक यात्रा और राज्यसभा टिकट मिलने के पीछे के घटनाक्रमों पर खुलकर बात की, राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका और देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर राहुल गांधी पर एक बड़ा दावा भी किया. आइए जानते हैं सचिन पायलट, अशोक गहलोत और राहुल गांधी को लेकर सांसद नीरज डांगी ने क्या कहा.
सवाल- राज्यसभा की दूसरी यात्रा को लेकर आप किस तरह की तैयारी कर रहे हैं?
नीरज डांगी का जवाब- राज्यसभा में देखिए तैयारी अपने एक तरीके से की जाती है, जैसा आपने प्रश्न किया. चुनाव प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. चुनाव की दृष्टि से अगर चौथा नामांकन आता सामने तो चुनाव होता. मैं समझता हूं कि तीनों उम्मीदवारों के नॉमिनेशंस जो है वो क्लियर हो गए.
सवाल- नीरज जी जब यह नामों का ऐलान होने वाला था उस समय बहुत सारे नाम सुर्खियों में थे तो आपकी भी धड़कन बढ़ी हुई थी?
जवाब- देखिए इसमें मैं कहना चाहूंगा कि मुझे किसी तरह का कोई प्रेशर नहीं था. पहली बात और धड़कनें तब बढ़ती है जब परिस्थितियां ऐसी लगती है कि कहीं शायद परिणाम विपरीत ना हो, यहां मुझे परिणाम की कोई चिंता नहीं थी. मुझे पूरा विश्वास था कि पार्टी मुझे निश्चित रूप से जो है मौका देगी. पिछले छह सालों में जो सदन में हम लोगों ने काम किया, अनगिनत मुद्दे राजस्थान से संबंधित और देश के जनहित से संबंधित हम लोगों ने उठाए. राजस्थान में ऐसे मुद्दे उठाए जिनका परिणाम भी सामने आया जब कोई मामला सदन में उठता है तो संबंधित मंत्रालय को वो मामला जो है विचार के लिए जाता है तो इस उसमें हम लोगों ने जीत भी हासिल की ऐसे कई मसलों में तो ऐसे में जहां छह साल का वक्त रहा उसको रिकॉग्नाइज पार्टी ने किया उसके लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद देना चाहूंगा मल्लिकार्जुन खड़गे जी का सोनिया गांधी जी का राहुल गांधी जी का प्रियंका जी का वेणुगोपाल जी का जो शीर्ष नेतृत्व रहा दिल्ली में और यहां राजस्थान में भी जो तमाम लीड लीडर्स हैं जिनसे चर्चा निश्चित रूप से हाईकमान की हुई होगी.
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सवाल- बहुत बड़ी-बड़ी चर्चाएं मीडिया में तो यह है कि आप अशोक गहलोत जी के सबसे करीबी हैं, विश्वास पात्र हैं. आपको यह टिकट इसलिए दोबारा मिला?
जवाब- देखिए विश्वास पात्र होना एक उपलब्धि है. वो कमी नहीं मानता हूं मैं. मैंने कोशिश की कि तमाम सारे लीडर्स का विश्वास मैं अर्जित करूं और मैं खुशनसीब हूं कि वो गौरव भी मुझे मिला कि सभी लीडर्स ने चाहे वो दिल्ली के नेता हो चाहे राजस्थान के तमाम लीडर्स हो उनका सबका जो है मुझे आशीर्वाद और समर्थन इस चुनाव में मिला. पिछला चुनाव जो है वह जरूर जैसा आपने कहा था कि दिल की धड़कनें बढ़ी नहीं बढ़ी उस समय जरूर बढ़ी होंगी. इस बार का चुनाव जो है मैं समझता हूं कि मुझे पूरा विश्वास था बहुत पहले से ही परिस्थितियां जिस तरह की बनी हुई थी और लीडरशिप भी मान रही थी कि हमें राजस्थान के अंदर रेपुटेशन करना है. एक 2028 का जो चुनाव है विधानसभा का वो हमारा फोकस रहेगा.
नीरज डांगी ने आगे कहा, जैसा यूथ कांग्रेस मूवमेंट रहा मेरा यूथ कांग्रेस का जब मैं स्टेट प्रेसिडेंट था तब इन्हीं लीडर्स ने एक भरोसा जताया था और उसका परिणाम भी सामने मिला जब 2008 का निर्णय हुआ परिणाम आया सामने विधानसभा चुनाव का तो उसमें बहुत बड़ी भूमिका युवक कांग्रेस की राजस्थान के युवाओं की, नौजवानों की और यूथ कांग्रेस की रही. तो मैं समझता हूं कि उसी तर्ज पर आने वाले वक्त में भी हम लोग काम करके 2028 में जहां आज परिस्थितियां बनी हुई है राजस्थान के अंदर क्योंकि ढाई साल में ही जनता ने एक आकलन कर लिया। जनता ने एक मन बना लिया है कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करना है. हालात राजस्थान के किस प्रकार से हैं कि एक गवर्न जो है दिल्ली से यह सरकार हो रही है और वहां से जो निर्देश मिल रहे हैं उसकी पालना भी यह नीचे के स्तर पर नहीं कर पा रहे हैं. मुख्यमंत्री की नहीं चले अगर किसी प्रदेश में तो आप समझ सकते हैं कि किस प्रकार की गवर्नेंस है, किस प्रकार की सरकार है.
सवाल- अच्छा नीरज जी दो इंपॉर्टेंट बातें आपने कही, एक तो ये कि आपको फुल कॉन्फिडेंस था. इसका मतलब आपको भीतर से पार्टी की आलाकमान की तरफ से कोई संकेत मिले थे?
जवाब- देखिए कुछ चीजें स्वाभाविक होती हैं. जब हम लोग काम करते हैं और काम के साथ-साथ आने वाले चुनाव की या आने वाले प्रक्रिया की जब बात करते हैं तो उसी में संकेत होते हैं. संकेत कांग्रेस पार्टी में या अन्य दलों में भी मुझे नहीं पता क्या होता है. लेकिन कांग्रेस पार्टी में परिस्थितियां इस तरह की होती हैं कि कभी भी यह नहीं कहा जाता कि हां आप 100% फाइनल है. जाइए और नामांकन भरिए, ऐसा कभी नहीं होता कि कोई सीनियर लीडर है उसके साथ भी नहीं होता. भाई साहब मैं तो बहुत जूनियर एक कार्यकर्ता की तरह हूं, कार्यकर्ता के रूप में मैंने काम किया है. लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि जब हम लोग चुनावी प्रक्रिया से पहले जब सीनियर लीडरशिप के बीच में बैठकर के जब हम लोगों ने काम किया काम करने के दौरान ही जो है हिंट्स मिलते जाते हैं कि हां कुछ संभावनाएं पॉजिटिव हैं और मुझे लगता है कि मुझे मौका मिलेगा. वो विश्वास जो मेरे मन में था उस विश्वास को पार्टी आलाकमान ने भी देखा और वो उन्होंने भी विश्वास जताया कि मैं आने वाले वक्त में पहले से भी ज्यादा बेहतर करके दिखाऊंगा.
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सवाल- आपने बताया कि आपके इक्वेशंस आपके समीकरण आपके जातिगत जो समीकरण है आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन आप आज भी मानते हैं कि ये जातिगत समीकरण बहुत बड़ी जरूरत है किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के कैंडिडेट के लिए?
जवाब- इसमें कहना चाहूंगा कि ये एक अकेला निर्णायक चीज नहीं है. जैसा मैंने कहा कि कई पैरामीटर्स होते हैं ये अलोन पैरामीटर नहीं है. ये एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है किसी भी उम्मीदवारी के निर्णय को लेकर, चाहे छोटे से चुनाव हो, सरपंच के चुनाव हो, पंचायतों के चुनाव हो, एमएलए, एमपी के चुनाव हो. यह तो राज्यसभा का चुनाव है, निश्चित रूप से एक समीकरण होता है और कांग्रेस सभी जातियों को साथ लेकर के चलने वाली पार्टी है. यहां कोई हिंदू मुस्लिम वाला कार्ड नहीं है. यहां कोई किसी व्यक्ति विशेष की जाति का कोई कार्ड नहीं है. यहां पर 3600 कौमों की बात होती है और आप लोगों ने लिस्ट भी देखी होगी. जब डिक्लेरेशन होता है तो हमारे जो सात आठ नाम का जो निर्णय हुआ उनमें कोशिश रही कि तमाम जातियों को समायोजित किया जाए. ताकि एक बैलेंस जो कांग्रेस पार्टी का रहता है कि 3600 कौमों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी जो है मलिकार्जुन खड़गे जी के कांग्रेस प्रेसिडेंट के नेतृत्व में वो चीज सामने नजर आती है.
सवाल- राज्यसभा में आपका यह दूसरा कार्यकाल है. पहले कार्यकाल की सफलता में से आप क्या ऐसा अचीवमेंट मानते हैं जो आपको लगता है कि दूसरे का बड़ा कारण बना. पहले कार्यकाल की बड़ी सफलता क्या है?
जवाब- सदन में एन वक्त पर 11th आवर पर कोई टॉपिक डिसाइड हो के दिया जाता है. तो अमूमन कई बार ऐसा हुआ कि दो-तीन ऐसे एमपीज हम लोग रहे उसमें से मैं भी हूं जिसे यह कहा गया कि आपको यह बोलना है 2:00 बजे आधे घंटे एक घंटे पहले. ऐसे में उस टॉपिक को अल्प समय में तैयार करके और प्रभावी रूप से सदन में रखना मैं समझता हूं कि एक जीत होती है किसी भी सांसद की और जब हम विपक्ष में हो किसी टॉपिक पर बातचीत कर रहे हो और सत्ता पक्ष उस टॉपिक के खिलाफ खड़ा होकर के विरोध में अपना विरोध दर्ज कराने की कोशिश करें तो मैं समझता हूं कि वहीं जो है एक विपक्षी सांसद की उस टॉपिक पर जीत हो जाती है.
सवाल- आप मानते हैं कि आप राजस्थान में 2028 में आने की तैयारी करेंगे. उसको लेकर बहुत सारी बातें हमने की. एक महत्वपूर्ण बात जो कांग्रेस पार्टी का जो आधार है, केंद्र बिंदु है वो राहुल गांधी है. राहुल गांधी के साथ आपने क्योंकि आप राज्यसभा में रहे तो काफी समय भी निकाला. राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में आप कितने स्थापित मानते हैं कि कितने सफल हैं?
जवाब- एक नेता की सफलता है ना उसका वैसे कोई पैमाना नहीं होता है, सामने चीज दिखती है. सदन में राहुल गांधी की उपस्थिति और उनकी उपस्थिति के पीछे प्रधानमंत्री का सदन में नहीं आना यह अपने आप में एक जिसे कहते हैं कि रिजल्ट है कि एलओपी के रूप में राहुल गांधी जी कितने सफल हैं और एक सफलतम एलओपी की भूमिका उन्होंने निभाई है. उनके उनके जो उनकी जो चर्चा है, उनके उनकी जो भाषण है उसको फेस करने की ताकत प्रधानमंत्री की नहीं है. ये सदन के पिछले सत्रों में देखने को मिला है. राहुल गांधी जी जो है जिस प्रकार से पूरे देश में मूवमेंट कर रहे हैं. उन तमाम राज्यों में भी जा रहे हैं जहां हमारी सरकारें नहीं हैं. एक बेहतरीन तरीके से कार्यकर्ता जुड़ रहा है. एक माहौल बन रहा है. कार्यकर्ता उत्तेजित है राहुल गांधी जी के नेतृत्व में काम करने के लिए. आने वाले वक्त के अंदर निश्चित रूप से 2029 जो होगा राहुल गांधी जी इस देश को जो है नेतृत्व प्रदान करेंगे प्रधानमंत्री के रूप में.
सवाल- आपने कहा कि इतने लंबे राजनीतिक सफर में आपने पारिवारिक फ्रंट पर बहुत कुछ खोया उसे कैसे मतलब कंपनसेट कैसे करेंगे?
जवाब- देखिए जो चीज चला जो दौर चला गया उसको कंपनसेट करना बड़ा मुश्किल है और जब-जब जिम्मेदारियां बढ़ती हैं तो मैं समझता हूं कि उन जिम्मेदारियों को बढ़ने के साथ-साथ हम जो कंपनसेट करने की कोशिश करते हैं वो कंपनसेट तो नहीं हो पाता बल्कि जो हमने खोया उसमें और इजाफा और हो जाता है. तो मैं समझता हूं पारिवारिक रूप से मेरे परिवार ने मेरी मदर ने मेरी वाइफ ने जिस प्रकार से परिवार को संभाला तो वो एक इंपैक्ट जो एक नेता पर आना चाहिए वो मुझ पर कहीं आने नहीं दिया. बच्चों की पढ़ाई हो या परिवार को संभालने की बात हो बिजनेसेस को संभालने की बात हो. इन तमाम चीजों में मेरे परिवार ने, मेरे भाइयों ने और मेरे वाइफ ने, मेरी मदर ने बहुत बहुत बेहतरीन तरीके से उस चीज को संभाला.
राजनीति में किस्मत, मेहनत और सही समय पर सही नेतृत्व का साथ मिलना कितना जरूरी है, यह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी के सफर से साफ झलकता है. न्यूज 24 की जानी-मानी पत्रकार और एंकर मीना शर्मा के साथ एक विशेष बातचीत में नीरज डांगी ने न सिर्फ अपनी राजनीतिक यात्रा और राज्यसभा टिकट मिलने के पीछे के घटनाक्रमों पर खुलकर बात की, राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका और देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर राहुल गांधी पर एक बड़ा दावा भी किया. आइए जानते हैं सचिन पायलट, अशोक गहलोत और राहुल गांधी को लेकर सांसद नीरज डांगी ने क्या कहा.
सवाल- राज्यसभा की दूसरी यात्रा को लेकर आप किस तरह की तैयारी कर रहे हैं?
नीरज डांगी का जवाब- राज्यसभा में देखिए तैयारी अपने एक तरीके से की जाती है, जैसा आपने प्रश्न किया. चुनाव प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. चुनाव की दृष्टि से अगर चौथा नामांकन आता सामने तो चुनाव होता. मैं समझता हूं कि तीनों उम्मीदवारों के नॉमिनेशंस जो है वो क्लियर हो गए.
सवाल- नीरज जी जब यह नामों का ऐलान होने वाला था उस समय बहुत सारे नाम सुर्खियों में थे तो आपकी भी धड़कन बढ़ी हुई थी?
जवाब- देखिए इसमें मैं कहना चाहूंगा कि मुझे किसी तरह का कोई प्रेशर नहीं था. पहली बात और धड़कनें तब बढ़ती है जब परिस्थितियां ऐसी लगती है कि कहीं शायद परिणाम विपरीत ना हो, यहां मुझे परिणाम की कोई चिंता नहीं थी. मुझे पूरा विश्वास था कि पार्टी मुझे निश्चित रूप से जो है मौका देगी. पिछले छह सालों में जो सदन में हम लोगों ने काम किया, अनगिनत मुद्दे राजस्थान से संबंधित और देश के जनहित से संबंधित हम लोगों ने उठाए. राजस्थान में ऐसे मुद्दे उठाए जिनका परिणाम भी सामने आया जब कोई मामला सदन में उठता है तो संबंधित मंत्रालय को वो मामला जो है विचार के लिए जाता है तो इस उसमें हम लोगों ने जीत भी हासिल की ऐसे कई मसलों में तो ऐसे में जहां छह साल का वक्त रहा उसको रिकॉग्नाइज पार्टी ने किया उसके लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद देना चाहूंगा मल्लिकार्जुन खड़गे जी का सोनिया गांधी जी का राहुल गांधी जी का प्रियंका जी का वेणुगोपाल जी का जो शीर्ष नेतृत्व रहा दिल्ली में और यहां राजस्थान में भी जो तमाम लीड लीडर्स हैं जिनसे चर्चा निश्चित रूप से हाईकमान की हुई होगी.
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सवाल- बहुत बड़ी-बड़ी चर्चाएं मीडिया में तो यह है कि आप अशोक गहलोत जी के सबसे करीबी हैं, विश्वास पात्र हैं. आपको यह टिकट इसलिए दोबारा मिला?
जवाब- देखिए विश्वास पात्र होना एक उपलब्धि है. वो कमी नहीं मानता हूं मैं. मैंने कोशिश की कि तमाम सारे लीडर्स का विश्वास मैं अर्जित करूं और मैं खुशनसीब हूं कि वो गौरव भी मुझे मिला कि सभी लीडर्स ने चाहे वो दिल्ली के नेता हो चाहे राजस्थान के तमाम लीडर्स हो उनका सबका जो है मुझे आशीर्वाद और समर्थन इस चुनाव में मिला. पिछला चुनाव जो है वह जरूर जैसा आपने कहा था कि दिल की धड़कनें बढ़ी नहीं बढ़ी उस समय जरूर बढ़ी होंगी. इस बार का चुनाव जो है मैं समझता हूं कि मुझे पूरा विश्वास था बहुत पहले से ही परिस्थितियां जिस तरह की बनी हुई थी और लीडरशिप भी मान रही थी कि हमें राजस्थान के अंदर रेपुटेशन करना है. एक 2028 का जो चुनाव है विधानसभा का वो हमारा फोकस रहेगा.
नीरज डांगी ने आगे कहा, जैसा यूथ कांग्रेस मूवमेंट रहा मेरा यूथ कांग्रेस का जब मैं स्टेट प्रेसिडेंट था तब इन्हीं लीडर्स ने एक भरोसा जताया था और उसका परिणाम भी सामने मिला जब 2008 का निर्णय हुआ परिणाम आया सामने विधानसभा चुनाव का तो उसमें बहुत बड़ी भूमिका युवक कांग्रेस की राजस्थान के युवाओं की, नौजवानों की और यूथ कांग्रेस की रही. तो मैं समझता हूं कि उसी तर्ज पर आने वाले वक्त में भी हम लोग काम करके 2028 में जहां आज परिस्थितियां बनी हुई है राजस्थान के अंदर क्योंकि ढाई साल में ही जनता ने एक आकलन कर लिया। जनता ने एक मन बना लिया है कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करना है. हालात राजस्थान के किस प्रकार से हैं कि एक गवर्न जो है दिल्ली से यह सरकार हो रही है और वहां से जो निर्देश मिल रहे हैं उसकी पालना भी यह नीचे के स्तर पर नहीं कर पा रहे हैं. मुख्यमंत्री की नहीं चले अगर किसी प्रदेश में तो आप समझ सकते हैं कि किस प्रकार की गवर्नेंस है, किस प्रकार की सरकार है.
सवाल- अच्छा नीरज जी दो इंपॉर्टेंट बातें आपने कही, एक तो ये कि आपको फुल कॉन्फिडेंस था. इसका मतलब आपको भीतर से पार्टी की आलाकमान की तरफ से कोई संकेत मिले थे?
जवाब- देखिए कुछ चीजें स्वाभाविक होती हैं. जब हम लोग काम करते हैं और काम के साथ-साथ आने वाले चुनाव की या आने वाले प्रक्रिया की जब बात करते हैं तो उसी में संकेत होते हैं. संकेत कांग्रेस पार्टी में या अन्य दलों में भी मुझे नहीं पता क्या होता है. लेकिन कांग्रेस पार्टी में परिस्थितियां इस तरह की होती हैं कि कभी भी यह नहीं कहा जाता कि हां आप 100% फाइनल है. जाइए और नामांकन भरिए, ऐसा कभी नहीं होता कि कोई सीनियर लीडर है उसके साथ भी नहीं होता. भाई साहब मैं तो बहुत जूनियर एक कार्यकर्ता की तरह हूं, कार्यकर्ता के रूप में मैंने काम किया है. लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि जब हम लोग चुनावी प्रक्रिया से पहले जब सीनियर लीडरशिप के बीच में बैठकर के जब हम लोगों ने काम किया काम करने के दौरान ही जो है हिंट्स मिलते जाते हैं कि हां कुछ संभावनाएं पॉजिटिव हैं और मुझे लगता है कि मुझे मौका मिलेगा. वो विश्वास जो मेरे मन में था उस विश्वास को पार्टी आलाकमान ने भी देखा और वो उन्होंने भी विश्वास जताया कि मैं आने वाले वक्त में पहले से भी ज्यादा बेहतर करके दिखाऊंगा.
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सवाल- आपने बताया कि आपके इक्वेशंस आपके समीकरण आपके जातिगत जो समीकरण है आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन आप आज भी मानते हैं कि ये जातिगत समीकरण बहुत बड़ी जरूरत है किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के कैंडिडेट के लिए?
जवाब- इसमें कहना चाहूंगा कि ये एक अकेला निर्णायक चीज नहीं है. जैसा मैंने कहा कि कई पैरामीटर्स होते हैं ये अलोन पैरामीटर नहीं है. ये एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है किसी भी उम्मीदवारी के निर्णय को लेकर, चाहे छोटे से चुनाव हो, सरपंच के चुनाव हो, पंचायतों के चुनाव हो, एमएलए, एमपी के चुनाव हो. यह तो राज्यसभा का चुनाव है, निश्चित रूप से एक समीकरण होता है और कांग्रेस सभी जातियों को साथ लेकर के चलने वाली पार्टी है. यहां कोई हिंदू मुस्लिम वाला कार्ड नहीं है. यहां कोई किसी व्यक्ति विशेष की जाति का कोई कार्ड नहीं है. यहां पर 3600 कौमों की बात होती है और आप लोगों ने लिस्ट भी देखी होगी. जब डिक्लेरेशन होता है तो हमारे जो सात आठ नाम का जो निर्णय हुआ उनमें कोशिश रही कि तमाम जातियों को समायोजित किया जाए. ताकि एक बैलेंस जो कांग्रेस पार्टी का रहता है कि 3600 कौमों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी जो है मलिकार्जुन खड़गे जी के कांग्रेस प्रेसिडेंट के नेतृत्व में वो चीज सामने नजर आती है.
सवाल- राज्यसभा में आपका यह दूसरा कार्यकाल है. पहले कार्यकाल की सफलता में से आप क्या ऐसा अचीवमेंट मानते हैं जो आपको लगता है कि दूसरे का बड़ा कारण बना. पहले कार्यकाल की बड़ी सफलता क्या है?
जवाब- सदन में एन वक्त पर 11th आवर पर कोई टॉपिक डिसाइड हो के दिया जाता है. तो अमूमन कई बार ऐसा हुआ कि दो-तीन ऐसे एमपीज हम लोग रहे उसमें से मैं भी हूं जिसे यह कहा गया कि आपको यह बोलना है 2:00 बजे आधे घंटे एक घंटे पहले. ऐसे में उस टॉपिक को अल्प समय में तैयार करके और प्रभावी रूप से सदन में रखना मैं समझता हूं कि एक जीत होती है किसी भी सांसद की और जब हम विपक्ष में हो किसी टॉपिक पर बातचीत कर रहे हो और सत्ता पक्ष उस टॉपिक के खिलाफ खड़ा होकर के विरोध में अपना विरोध दर्ज कराने की कोशिश करें तो मैं समझता हूं कि वहीं जो है एक विपक्षी सांसद की उस टॉपिक पर जीत हो जाती है.
सवाल- आप मानते हैं कि आप राजस्थान में 2028 में आने की तैयारी करेंगे. उसको लेकर बहुत सारी बातें हमने की. एक महत्वपूर्ण बात जो कांग्रेस पार्टी का जो आधार है, केंद्र बिंदु है वो राहुल गांधी है. राहुल गांधी के साथ आपने क्योंकि आप राज्यसभा में रहे तो काफी समय भी निकाला. राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में आप कितने स्थापित मानते हैं कि कितने सफल हैं?
जवाब- एक नेता की सफलता है ना उसका वैसे कोई पैमाना नहीं होता है, सामने चीज दिखती है. सदन में राहुल गांधी की उपस्थिति और उनकी उपस्थिति के पीछे प्रधानमंत्री का सदन में नहीं आना यह अपने आप में एक जिसे कहते हैं कि रिजल्ट है कि एलओपी के रूप में राहुल गांधी जी कितने सफल हैं और एक सफलतम एलओपी की भूमिका उन्होंने निभाई है. उनके उनके जो उनकी जो चर्चा है, उनके उनकी जो भाषण है उसको फेस करने की ताकत प्रधानमंत्री की नहीं है. ये सदन के पिछले सत्रों में देखने को मिला है. राहुल गांधी जी जो है जिस प्रकार से पूरे देश में मूवमेंट कर रहे हैं. उन तमाम राज्यों में भी जा रहे हैं जहां हमारी सरकारें नहीं हैं. एक बेहतरीन तरीके से कार्यकर्ता जुड़ रहा है. एक माहौल बन रहा है. कार्यकर्ता उत्तेजित है राहुल गांधी जी के नेतृत्व में काम करने के लिए. आने वाले वक्त के अंदर निश्चित रूप से 2029 जो होगा राहुल गांधी जी इस देश को जो है नेतृत्व प्रदान करेंगे प्रधानमंत्री के रूप में.
सवाल- आपने कहा कि इतने लंबे राजनीतिक सफर में आपने पारिवारिक फ्रंट पर बहुत कुछ खोया उसे कैसे मतलब कंपनसेट कैसे करेंगे?
जवाब- देखिए जो चीज चला जो दौर चला गया उसको कंपनसेट करना बड़ा मुश्किल है और जब-जब जिम्मेदारियां बढ़ती हैं तो मैं समझता हूं कि उन जिम्मेदारियों को बढ़ने के साथ-साथ हम जो कंपनसेट करने की कोशिश करते हैं वो कंपनसेट तो नहीं हो पाता बल्कि जो हमने खोया उसमें और इजाफा और हो जाता है. तो मैं समझता हूं पारिवारिक रूप से मेरे परिवार ने मेरी मदर ने मेरी वाइफ ने जिस प्रकार से परिवार को संभाला तो वो एक इंपैक्ट जो एक नेता पर आना चाहिए वो मुझ पर कहीं आने नहीं दिया. बच्चों की पढ़ाई हो या परिवार को संभालने की बात हो बिजनेसेस को संभालने की बात हो. इन तमाम चीजों में मेरे परिवार ने, मेरे भाइयों ने और मेरे वाइफ ने, मेरी मदर ने बहुत बहुत बेहतरीन तरीके से उस चीज को संभाला.