Sunday, September 25, 2022
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NCP में नाराजगी के सवाल पर बिफरे अजीत पवार, बोले- मैं परेशान नहीं हूं, क्या मैं इसे स्टांप पेपर पर लिखूं?

नाराजगी को लेकर जब पत्रकारों ने अजीत पवार से बात की तो उन्होंने कहा कि NCP के कार्यक्रम में मुझे किसी ने बोलने से नहीं रोका। मैं वॉशरूम गया था, क्या मैं बाहर नहीं जा सकता? 

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सोमवार को इस बात से इनकार किया कि वे रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की बैठक में मंच से चले गए क्योंकि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं थी। अजीत पवार ने कहा कि मैं परेशान नहीं हूं, क्या मैं इसे स्टांप पेपर पर लिखूं?

बता दें कि अजीत पवार को रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने चाचा शरद पवार और NCP के अन्य सीनियर नेताओं के सामने मंच से उठकर बाहर जाते हुए देखा गया था। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में शरद पवार को चार साल के लिए पार्टी का प्रमुख बनाया गया।

जयंत पाटिल को बुलाया तो मंच से गए अजीत पवार

दिल्ली के तालकटोरा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम को NCP के महाराष्ट्र चीफ जयंत पाटिल और शरद पवार ने संबोधित किया। जयंत पाटिल को बोलने के लिए आमंत्रित किए जाने के कुछ ही देर बाद अजीत पवार मंच से चले गए, जिससे अजीत पवार और एनसीपी के बीच सबकुछ ठीक न होने की खबरें आईं।

नाराजगी को लेकर जब पत्रकारों ने अजीत पवार से बात की तो उन्होंने कहा कि NCP के कार्यक्रम में मुझे किसी ने बोलने से नहीं रोका। मैं वॉशरूम गया था, क्या मैं बाहर नहीं जा सकता? उन्होंने कहा, “मीडिया को तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट करनी चाहिए। मैं यहां राज्य में चल रहे मुद्दों पर बोलने के लिए आया हूं।”

मैं इसलिए नहीं बोला, क्योंकि ये राष्ट्रीय स्तर की बैठक थी: अजीत पवार

NCP के सीनियर नेता ने कहा कि वह इसलिए नहीं बोले क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की बैठक थी। NCP सांसद प्रफुल्ल पटेल ने मंच पर घोषणा की थी कि शरद पवार की समापन टिप्पणी से पहले अजीत पवार बोलेंगे लेकिन जब समय आया, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री मंच से गायब थे।

समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि NCP सांसद सुप्रिया सुले, शरद पवार की बेटी, अपने चचेरे भाई को मंच पर लौटने के लिए मनाने की कोशिश कर रही थीं। जब अजीत पवार वापस अंदर गए, तो शरद पवार ने अपनी समापन टिप्पणी शुरू कर दी थी और उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला।

अजीत पवार 2019 में अपनी पार्टी से कुछ समय के लिए अलग हो गए, जब उन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिलाया और देवेंद्र फडणवीस के साथ महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली, हालांकि ये सरकार महज 80 घंटे ही चल पाई।

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