BMC Engineer Transfers: देश की सबसे अमीर महानगर पालिका बीएमसी में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर अब बड़ा बदलाव किया गया है. ट्रांसफर में राजनीतिक दखल और ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ जैसे गंभीर आरोपों के बीच BMC प्रशासन ने अब पूरी प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर बेस्ड करने का फैसला किया है. नए सिस्टम के तहत इंजीनियरों के तबादले ऑनलाइन रैंडमाइजेशन सिस्टम के जरिए किए जाएंगे.

ट्रांसफर का नया सिस्टम

बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, अब इंजीनियरों के ट्रांसफर ‘Employee Transfer System Based on Randomization’ के तहत होंगे. यानी तबादलों में इंसानी दखल को कम करने और प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर की मदद ली जाएगी.

---विज्ञापन---

5 सितंबर से शुरू होंगे ऑनलाइन एप्लिकेशन

नई व्यवस्था के तहत तबादले के लिए एलिजिबल जूनियर इंजीनियर, सब-इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर 5 सितंबर से 20 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन एप्लाई कर सकेंगे. इंजीनियर्स को अपनी पसंद की कम से कम एक और अधिकतम 5 लोकेशन या स्ट्रक्चरल डिपार्टमेंट के विकल्प देने होंगे. सिस्टम प्रशासनिक जरूरत, खाली पदों, प्राप्त आवेदनों और तबादले से जुड़ी सिफारिशों जैसे निर्धारित मानकों के आधार पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा.

3 साल से एक ही जगह काम करने वालों का क्या होगा?

नई व्यवस्था के मुताबिक जो इंजीनियर किसी सेक्शन या विभाग में लगातार 3 साल से काम कर रहे हैं और अपनी पसंद की पोस्टिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं करते, उनके तबादले का फैसला भी सिस्टम के जरिए किया जाएगा.
हालांकि दिशा संबंधी या मेडिकल कारणों से तबादले की जरूरत होने पर ऑफलाइन आवेदन की सुविधा जारी रहेगी.

---विज्ञापन---

‘कैश फॉर ट्रांसफर’ के आरोपों के बाद बड़ा फैसला

BMC में इंजीनियरों के तबादले लंबे समय से विवादों में रहे हैं. आरोप लगते रहे हैं कि कई मामलों में योग्यता और वरिष्ठता के बजाय राजनीतिक प्रभाव के आधार पर मनचाही पोस्टिंग हासिल की जाती है. तबादलों को लेकर राजनीतिक सिफारिशों और कथित आर्थिक लेनदेन के आरोप भी सामने आते रहे हैं.

BJP विधायक मिहिर कोटेचा ने बीएमसी इंजीनियरों के तबादलों में कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ का आरोप लगाते हुए वित्तीय लेनदेन की डिटेल्ड जांच की मांग की थी. ये दावा भी सामने आया था कि केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नगर निगम पार्षदों की सिफारिशों से जुड़े लेटर ट्रांसफर प्रॉसेस में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं.

---विज्ञापन---

इन आरोपों के बीच बीएमसी प्रशासन का नया सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम अहम कदम माना जा रहा है. अब देखना होगा कि रैंडमाइजेशन सिस्टम लागू होने के बाद इंजीनियरों के तबादलों में राजनीतिक दखल और कथित ‘जुगाड़’ पर असल में कितना अंकुश लग पाता है.

---विज्ञापन---