Ankush jaiswal
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मराठवाड़ा के लातूर जिले से सामने आई एक तस्वीर ने खेती-किसानी की बदहाल हकीकत को फिर से सबके सामने ला खड़ा किया है. यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि उस संघर्ष की तस्वीर है जो आज भी देश के लाखों किसान हर दिन जी रहे हैं. देवनी तहसील के एक किसान परिवार पर उस समय मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, जब बेमौसम बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से उनके बैल जोड़े का एक बैल की मौत हो गई. खेत की जुताई से लेकर खेती के तमाम कामों का आधार बने बैल के अचानक चले जाने से किसान के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया.
खेत तैयार करना जरूरी था और नया बैल खरीदने की आर्थिक क्षमता किसान के पास नहीं थी. ऐसे में परिवार ने जो फैसला लिया, उसने पूरे राज्य को भावुक कर दिया.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में किसान और उसकी पत्नी खुद हल में जुते दिखाई दे रहे हैं. बैलों की जगह पति-पत्नी अपने कंधों पर हल का बोझ उठाकर खेत जोत रहे हैं, जबकि पीछे एक व्यक्ति हल संभालता नजर आ रहा है. तपती मिट्टी पर पसीना बहाते इस दंपति की तस्वीर ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है.
वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा. किसान परिवार की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया है. लातूर के जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी है. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किसान परिवार को किस प्रकार की सरकारी सहायता और राहत उपलब्ध कराई जा सकती है.
उधर, विपक्षी दलों ने भी इस घटना को किसानों की बदहाली का प्रतीक बताते हुए सरकार से विशेष आर्थिक सहायता और मृत बैल के लिए उचित मुआवजे की मांग की है. उनका कहना है कि यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे बड़ा बोझ आज भी किसान ही उठा रहा है.
सरकार की ओर से भी नियमों के तहत हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है. हालांकि, इस तस्वीर ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या आज भी महाराष्ट्र का किसान इतना मजबूर है कि बैल की मौत के बाद उसे खुद हल में जुतना पड़ रहा है?
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