Ankush jaiswal
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सफेद कोट पहनकर मरीजों का इलाज करना आसान था, लेकिन इलाज के लिए जरूरी डिग्री और लाइसेंस लेना शायद इन पांच लोगों को जरूरी नहीं लगा. मुंबई क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही पांच कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है, जो बिना मेडिकल डिग्री, वैलिड लाइसेंस और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के मरीजों का इलाज कर रहे थे. मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की यूनिट 6 और यूनिट 8 को इन लोगों के बारे में जानकारी मिली थी. इसके बाद बीएमसी के मेडिकल अधिकारियों को साथ लेकर टीम ने देवनार के जाकिर हुसैन नगर और बांद्रा पूर्व के नौपाड़ा इलाके में चल रहे पांच क्लीनिकों पर छापेमारी की.
पुलिस के मुताबिक, छापेमारी के दौरान तस्वीर और भी गंभीर नजर आई. आरोपी क्लीनिक में मरीजों की जांच कर रहे थे और उन्हें दवाइयों के साथ-साथ इंजेक्शन भी लगा रहे थे. पूछताछ और जांच में सामने आया कि उनके पास मरीजों का इलाज करने के लिए जरूरी कोई मान्य मेडिकल डिग्री या लाइसेंस नहीं था, यानी इलाज का पूरा इंतजाम था, लेकिन डॉक्टर होने की कानूनी योग्यता नहीं. क्राइम ब्रांच ने पांचों आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 19 हजार 324 रुपये कीमत की दवाइयां और मेडिकल सामान बरामद किया है. इनमें इंजेक्शन, एंटीबायोटिक टैबलेट, सिरिंज और दूसरी मेडिकल सामग्री शामिल है.
पुलिस ने जिन आरोपियों को पकड़ा है, उनकी पहचान सगीर अहमद अब्दुल माजिद हाशमी, अखिलेश कुमार देवेंद्र कुमार दुबे, मेहमुद आलम मोहम्मद शरीफ शेख, केशव प्रसाद कुद्दुर पटेल और मोहम्मद आफताब शौकिम खान के रूप में हुई है. इस मामले में देवनार और निर्मल नगर पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये लोग कब से बिना वैध योग्यता के क्लीनिक चला रहे थे और अब तक कितने मरीजों का इलाज कर चुके हैं. क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने शहर में बिना डिग्री और पंजीकरण के चल रहे ऐसे क्लीनिकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बीमारी का इलाज गलत हाथों में पहुंच जाए, तो दवा और इंजेक्शन भी मरीज के लिए खतरा बन सकते हैं.
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