रैबीज बीमारी कितनी खतरनाक? जिसके डर से मुंबई के सीनियर अफसर ने खुद दे दी जान

मुंबई से सटे कल्याण में एक बैंक में सीनियर पोस्ट पर काम करने वाले अफसर ने आवारा कुत्ते के काटने पर रेबीज बीमारी होने के डर से आत्महत्या कर ली. इंजेक्शन लगवाने के बावजूद उन्हें डर था कि अगर उन्हें रेबीज हुआ तो उनके परिवार को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी. जानें कितनी खतरनाक है रेबीज बीमारी?

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प्रतिष्ठित बैंक में सीनियर पोस्ट पर कार्यरत कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी में रहने वाले एस विश्वनाथ अमीन ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. कुछ दिन पहले ऐस के पैर में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था. रेबीज का इंजेक्शन (वैक्सीन) भी लगवाया था. इंजेक्शन लगवाने के बावजूद ऐस गहरे तनाव में थे. उन्हें लगातार यह भ्रम हो रहा था कि उनमें रेबीज के लक्षण दिखने लगे हैं. उन्हें डर था कि अगर उन्हें रेबीज हुआ, तो उनके परिवार को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी. इसी डर और मानसिक दबाव के चलते उन्होंने खौफनाक कदम उठा लिया.

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शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर हर्षल गायकवाड़ से मुलाकात की और उनसे आवारा कुत्तों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की.

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रैबीज बीमारी कितनी खतरनाक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज घातक जरूर है, लेकिन PEP यानी सही वैक्सीन कोर्स लेने पर इससे पूरी तरह बचा जा सकता है. मानसिक डर कई बार बीमारी से ज्यादा खतरनाक हो जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर से परामर्श और काउंसिलिंग बहुत जरूरी है. संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 1 से 3 महीने का समय लग सकता है. लक्ष्ण दिखने शुरू हो जाएं तो यह बीमारी गंभीर हो सकती है. यह बीमारी सीधे इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है. हालांकि बीज के मामले में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.

बीमारी के शुरुआती संकेत क्या

बीमारी के शुरुआती लक्ष्णों में काटने वाली जगह पर खुजली, जलन, चुभन या सुन्नपन महसूस होना मुख्य शुरुआती लक्ष्ण है. हल्का बुखार और सिरदर्द रह सकता है. भूख न लगना या गले में खराश और थकान और मांसपेशियों में दर्द भी इस बीमारी के शुरुआती लक्ष्णों में से एक है.

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Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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