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बिना एक भी पैसा दिए स्लीपर से AC कोच में कैसे शिफ्ट होता है टिकट? IRCTC की इस जादुई ट्रिक को समझें

IRCTC Auto Upgradation Facility: भारतीय रेलवे का ऑटो अपग्रेडेशन सिस्टम वेटिंग यात्रियों के लिए वरदान साबित हो रहा है. इसके जरिए बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के यात्रियों को ऊंची श्रेणी में कंफर्म सीट दी जाती है.

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Written By: Raja Alam Updated: May 12, 2026 16:49
How Ticket Upgradation Works in Different Classes
रेलवे ऑटो अपग्रेडेशन सिस्टम क्या है?

IRCTC Auto Upgradation: भारतीय रेलवे ने यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने और वेटिंग लिस्ट की समस्या को कम करने के लिए एक शानदार तकनीक अपनाई है जिसे ऑटो अपग्रेडेशन सिस्टम कहा जाता है. इस सुविधा की शुरुआत 26 जनवरी 2006 को सबसे पहले मुंबई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से की गई थी. बाद में इसकी सफलता को देखते हुए इसे सभी राजधानी और प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में लागू कर दिया गया. साल 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक रेलवे ने लगभग 741 करोड़ यात्रियों को सफर कराया है. यात्रियों की इसी भारी तादाद को देखते हुए रेलवे ने यह नियम बनाया है कि चार्ट तैयार करते समय अगर ऊपर की श्रेणी में सीटें खाली रहती हैं, तो नीचे की श्रेणी के वेटिंग वाले यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ऊपर की क्लास में शिफ्ट कर दिया जाता है.

रेलवे में कैसे काम करता है अपग्रेडेशन?

रेलवे के अपग्रेडेशन सिस्टम के कुछ खास नियम हैं जिन्हें समझना हर यात्री के लिए जरूरी है. फोटो में दी गई जानकारी के अनुसार अपग्रेडेशन अधिकतम दो श्रेणी ऊपर तक ही हो सकता है. उदाहरण के लिए अगर आपने स्लीपर (SL) का टिकट लिया है, तो आप 3A या 2A तक अपग्रेड किए जा सकते हैं. बैठने वाली सीटों यानी सिटिंग अरेंजमेंट में सेकंड सिटिंग (2S) से विस्टाडोम नॉन-एसी या एसी चेयर कार (CC) तक प्रमोशन मिल सकता है. हालांकि फर्स्ट एसी (1A) और एग्जीक्यूटिव क्लास (EC/EV) जैसी प्रीमियम श्रेणियों के लिए नियम थोड़े सख्त हैं. इन लग्जरी क्लास में अपग्रेडेशन केवल ठीक नीचे वाली श्रेणी से ही संभव है, जैसे 2A से 1A में या सीसी से ईसी में.

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सीटिंग और स्लीपिंग कोच के अपग्रेडेशन

रेलवे ने कोच की श्रेणी के हिसाब से एक स्पष्ट पदानुक्रम या लैडर तैयार किया है. बैठने वाली सीटों (Sitting) के लिए यह क्रम 2S से शुरू होकर विस्टाडोम, फिर एसी चेयर कार, एग्जीक्यूटिव चेयर कार और अंत में अनुभूति क्लास (Anubhuti) तक जाता है. वहीं सोने वाली सीटों यानी स्लीपिंग क्लास (Sleeping) के लिए सबसे नीचे स्लीपर क्लास है, उसके ऊपर 3AC इकोनॉमी (3E), फिर 3AC, उसके बाद 2AC और सबसे ऊपर 1AC आता है. यह पूरी प्रक्रिया चार्ट बनने के समय ऑटोमेटिक होती है. इसमें यात्री को अपनी तरफ से कुछ नहीं करना होता है, बस टिकट बुक करते समय ‘Consider for Auto Upgradation’ वाले विकल्प को चुनना होता है.

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किसे मिलता है फायदा और किन बातों का रखें ध्यान

इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं यात्रियों को मिलता है जिन्होंने पूरा किराया देकर टिकट बुक किया है. सीनियर सिटीजन या लोअर बर्थ कोटा के तहत टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अपग्रेडेशन का विकल्प चुनते समय सावधान रहना चाहिए. रेलवे के मुताबिक अगर ऐसे यात्री अपग्रेड होते हैं, तो यह जरूरी नहीं कि ऊपर की क्लास में भी उन्हें लोअर बर्थ ही मिले. वर्तमान में संपूर्ण क्रांति, कर्नाटक एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस और गीतांजलि एक्सप्रेस जैसी 15 से ज्यादा बड़ी ट्रेनों में यह सिस्टम बखूबी काम कर रहा है. रेलवे का लक्ष्य डिजिटल तकनीक और एआई के जरिए इस सिस्टम को और भी बेहतर बनाना है ताकि यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ सके और उनका सफर सुखद रहे.

First published on: May 12, 2026 04:49 PM

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