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शिक्षा

नासिक प्रेस से हुआ ‘पेपर का खेल’! 30 हजार से 2800000 तक में बिका NEET का लीक प्रश्नपत्र, कैसे खुली पोल?

अब NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई के हवाले कर दी है. एजेंसी को इस मामले की जांच का आदेश मिल चुका है और जल्द ही रेगुलर केस दर्ज करके जांच शुरू की जाएगी.

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Written By: Indrajeet Singh Updated: May 12, 2026 18:07
NSUI के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को नई दिल्ली में NEET-UG पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्रालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया. (Image- ANI)

राजस्थान का सीकर, जो कभी शिक्षा के नए हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा था, आज NEET-UG पेपर लीक का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है. जांच में एक ऐसा ‘ट्रेल’ सामने आया है, जिसने सुरक्षा की तमाम बड़ी-बड़ी दावों की पोल खोल दी है. नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ यह खेल, सीकर के एक हॉस्टल संचालक की एक छोटी सी ‘डिजिटल गलती’ के कारण बेनकाब हो गया.

नासिक से सीकर तक कैसे पहुंचा

जांच में खुलासा हुआ है कि NEET का पेपर सीधे नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक किया गया था. प्रेस से यह पेपर एक चेन के जरिए गुरुग्राम (हरियाणा) के एक डॉक्टर के पास पहुंचा. जयपुर के जमवा रामगढ़ के एक शख्स ने इसे डॉक्टर से खरीदा और फिर यह सीकर के राकेश कुमार मंडावरिया तक पहुंचा, जो एमबीबीएस काउंसलिंग एजेंट है.

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पेपर एग्जाम से करीब 15 दिन पहले लीक हुआ था. पेपर को 30,000 रुपये से लेकर 28 लाख रुपये तक में बेचा गया. नागौर के एक छात्र ने तो सिर्फ एक ‘गेस पेपर’ के लिए 28 लाख रुपये चुकाए थे.

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‘गेस पेपर’ के नाम पर लीक

माफियाओं ने इसे सीधे ‘लीक पेपर’ कहने के बजाय ‘गेस पेपर’ के रूप में बेचा. इसमें कुल 281 सवाल थे. जब असल परीक्षा के बाद मिलान किया गया, तो जांचकर्ता भी दंग रह गए. बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल उस गेस पेपर में मौजूद थे. केमिस्ट्री के सवालों का क्रम भी वही था जो ओरिजिनल पेपर में था. यहां तक कि कोमा और फुल स्टॉप की भी कोई तब्दीली नहीं की गई थी.

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अब तक की जांच में ‘Private Mafia’ नाम का एक व्हाट्सऐप ग्रुप भी मिला है. इस ग्रुप में करीब 400 सदस्य बताए जा रहे हैं. ग्रुप के कैप्शन में लिखा था कि यह ग्रुप सिर्फ लीक एग्जाम पेपर अपलोड करने के लिए बनाया गया है और पेपर्स को ग्रुप से बाहर फॉरवर्ड न करने की चेतावनी भी दी गई थी.

एक मैसेज और रद्द हो गई परीक्षा

इस पूरे खेल का भंडाफोड़ तब हुआ जब लालच ने सावधानी को पीछे छोड़ दिया. राकेश मंडावरिया ने पेपर केरल में एमबीबीएस पढ़ रहे अपने एक साथी को भेजा. उस छात्र ने परीक्षा से एक रात पहले सीकर में पीजी चलाने वाले अपने पिता को व्हाट्सएप किया – ‘पापा, कल की परीक्षा में यही आएगा, हॉस्टल की लड़कियों को दे दो.’

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हॉस्टल संचालक ने इसे लड़कियों के बीच बांट दिया. लेकिन परीक्षा के बाद जब उसे अहसास हुआ कि उसने क्या कर दिया है, तो उसने पुलिस से संपर्क किया. पुलिस ने पहले इसे अफवाह बताया, लेकिन जब मामला NTA और फिर IB तक पहुंचा, तो राजस्थान SOG ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर 15 लोगों को धर दबोचा.

पेपर लीक का नया ‘अड्डा’

कोटा के बाद सीकर कोचिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा है, लेकिन अब यह पेपर लीक नेटवर्क का भी गढ़ बनता दिख रहा है. जांच एजेंसियों का मानना है कि जयपुर में पेपर पहले आया था, लेकिन इसका सबसे बड़ा नेटवर्क सीकर में ही फैला हुआ था.

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बता दें, अब NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई के हवाले कर दी है. एजेंसी को इस मामले की जांच का आदेश मिल चुका है और जल्द ही रेगुलर केस दर्ज करके जांच शुरू की जाएगी. इसके बाद सीबीआई की एक विशेष टीम बनाई जाएगी, जो पूरे मामले की बारीकी से जांच करेगी.

First published on: May 12, 2026 06:05 PM

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