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अजित पवार प्लेन क्रैश केस की जांच में CID ने दिखाई तेजी, हर एंगल से हो रही बारीक इन्वेस्टिगेशन

जांच में बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विभाग और फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री पुणे का सहयोग लिया जा रहा है. साथ ही तकनीकी कारणों की जांच के लिए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के साथ समन्वय स्थापित किया गया है.

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महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार की कथित प्लेन क्रैश में हुई मौत के मामले में जांच तेज कर दी गई है. राज्य सरकार द्वारा जांच की जिम्मेदारी महाराष्ट्र स्टेट CID को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने बहुआयामी जांच शुरू कर दी है. CID के आईजी सुनील रामानंद के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा व्यापक रखा गया है. इसमें आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी), आपराधिक लापरवाही (क्रिमिनल नेग्लिजेंस) और अन्य संभावित आपराधिक पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. घटना के तुरंत बाद एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज कर वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की गई.

कई टीमों के साथ मिलकर की जा रही जांच

जांच में बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विभाग और फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री पुणे का सहयोग लिया जा रहा है. साथ ही तकनीकी कारणों की जांच के लिए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के साथ समन्वय स्थापित किया गया है. संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की आपराधिक साजिश या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी.

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रोहित पवार लगातार उठा रहे है सवाल


इस बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक Rohit Pawar लगातार जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं. रोहित पवार का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए और सभी पहलुओं को सार्वजनिक किया जाना चाहिए. रोहित पवार ने इस मामले में मुंबई के मरीन ड्राइव और बारामती पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की. हालांकि, पुलिस ने औपचारिक एफआईआर दर्ज करने के बजाय उनकी लिखित शिकायत स्वीकार कर ली. इस कदम को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं और उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है.

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First published on: Feb 26, 2026 06:25 PM

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