बाल ठाकरे के एक ईशारे पर थम जाती थी मुंबई, बर्थडे पर जानें शिवसेना संस्थापक से जुड़े 8 फैक्ट्स

Bal Thackeray birthday special: बाल केशव ठाकरे, जिनके बारे में कहा जाता था कि उनके एक ईशारे पर मुंबई थम जाती थी. कभी चुनावी मैदान में कदम रखे बिना बाल ठाकरे की की आवाज, उनकी पार्टी और उनके समर्थक इतने प्रभावशाली थे कि महाराष्ट्र की सरकारें बनती-बिगड़ती उनकी मर्जी से थीं. आज बाल ठाकरे के बर्थडे पर जानें उनसे जुड़े 8 फैक्ट्स

Bal Thackeray birthday
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Bal Thackeray birthday special: महाराष्ट्र के पुणे में 23 जनवरी 1926 में जन्मे बाल ठाकरे ने जो विरासत छोड़ी, वो पद से बड़ी थी. आज भी महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे फैमिली और शिवसेना की चर्चा होती है. बाल ठाकरे ने पेशेवर करियर की शुरुआत बॉम्बे के अंग्रेजी दैनिक ‘ द फ्री प्रेस जर्नल’ में कार्टूनिस्ट के रूप में की. उनके कार्टून टाइम्स ऑफ इंडिया के संडे एडिशन में भी छपते थे. 1960 में अखबार छोड़ बाल ठाकरे ने अपना साप्ताहिक पत्रिका मर्मिक शुरू की, जिसमें बाल ठाकरे ने मुंबई में गैर-मराठी लोगों के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ अभियान चलाया, जो बाद में शिवसेना के संस्थापक और सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे.

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शिवसेना की बिना चुनाव वाली ताकत

बाल ठाकरे की शिवसेना में कभी औपचारिक चुनाव नहीं हुए. बाल ठाकरे खुद को पार्टी का प्रमुख मानते थे, लेकिन कभी चुनाव नहीं लड़े. फिर भी उनकी लोकप्रियता, बेबाक बयान, कार्टून और “मराठी मानूस” का नारा इतना मजबूत था कि शिवसेना मुंबई और महाराष्ट्र में बहुत ताकतवर हो गई. 1995 में पहली बार BJP से गठबंधन किया. खुद मुख्यमंत्री नहीं बने और मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री बनवाया. ठाकरे ने कहा था –’मैं रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाऊंगा’ वे मंत्रिमंडल में बैठे बिना ही फैसले लेते थे, कौन मंत्री बनेगा, क्या नीति आएगी. 1999 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन टूटा, लेकिन ठाकरे की ताकत बनी रही.

सरनेम में बदलाव का रोचक किस्सा

बाल ठाकरे के सरनेम में बदलाव का भी किस्सा बेहद रोचक है. बाल ठाकरे के पिता केशव का सरनेम ठाकरे (Thakre) था, लेकिन बाल ठाकरे ने इसे Thackeray कर लिया क्योंकि वे ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस ठाकरे (William Makepeace Thackeray) के बड़े फैन थे. 19 जून 1966 को बाल ठाकरे ने ‘महाराष्ट्र मराठी लोगों का’ नारे के साथ शिवसेना की स्थापना की. शुरू में यह पार्टी मराठी युवाओं को नौकरियां और अधिकार दिलाने के लिए बनी, लेकिन बाद में यह हिंदू राष्ट्रवाद की ओर मुड़ी. उनके समर्थक उन्हें टाइगर कहते थे. वे कभी चुनाव नहीं लड़े, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में ‘किंगमेकर’ रहे.

बाल ठाकरे की जिंदगी से जुड़े दिलचस्प तथ्य

  • 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से बैन: 1999 में बाल ठाकरे के भड़काऊ भाषण के कारण चुनाव आयोग ने उन्हें 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से बैन कर दिया और वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया, लेकिन तब तक वे पहले ही किंगमेकर बन चुके थे. मुंबई का नाम बॉम्बे से मुंबई बदलवाया.
  • माइकल जैक्सन से मुलाकात: माइकल जैक्सन ने मुंबई आने पर बाल ठाकरे से मुलाकात की. ठाकरे ने उन्हें सिल्वर तबला और तानपुरा गिफ्ट किया. जैक्सन ने उनके घर के टॉयलेट पर ऑटोग्राफ भी दिया.
  • अमिताभ बच्चन को कार्टून गिफ्ट: जब अमिताभ बच्चन कूली फिल्म के सेट पर घायल हुए और मौत के मुंह से लौटे, तो बाल ठाकरे ने उन्हें एक कार्टून भेंट किया जिसका टाइटल था – ‘Defeating Yamraj’
  • हिटलर के फैन: बाल ठाकरे एडॉल्फ हिटलर के एडमायरर थे और उनकी तस्वीरें अपने घर में रखते थे, लेकिन वे कहते थे कि वे हर मुस्लिम के खिलाफ नहीं हैं – सिर्फ उन लोगों के खिलाफ जो देश के कानून नहीं मानते.
  • मौत पर 21 तोपों की सलामी: 17 नवंबर 2012 को उनकी मौत पर भारत सरकार ने उन्हें 21 तोपों की सलामी दी, जो आमतौर पर राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को मिलती है. उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए.
  • डिज्नीलैंड का शौक: वे डिज्नीलैंड गए थे और वहां के हर कैरेक्टर (मिकी, मिनी, डोनाल्ड डक) से मिलकर खुश हुए. वे खुद को वॉल्ट डिज्नी जैसा कार्टूनिस्ट मानते थे.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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