महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के घाटकोपर स्थित चिरागनगर में लोकशाहीर साहित्यरत्न अन्नाभाऊ साठे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों भूमिपूजन किया गया. झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) द्वारा विकसित किए जाने वाले इस अत्याधुनिक परिसर का उद्देश्य अन्नाभाऊ साठे के साहित्य, विचार और सामाजिक योगदान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है.
इस अवसर पर एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर ने कहा कि यह संस्थान केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान, प्रशिक्षण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का एक बड़ा केंद्र बनेगा. उन्होंने कहा कि यह परियोजना महाराष्ट्र के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा देगी.
कई दिग्गज नेता रहे मौजूद
भूमिपूजन समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, आशीष शेलार, संजय शिरसाट, विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहिर, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े, सांसद संजय दिना पाटिल, विधायक राम कदम, दिलीप लांडे, मिहिर कोटेचा, कालिदास कोळंबकर, प्रसाद लाड सहित कई जनप्रतिनिधि और अन्नाभाऊ साठे के परिजन भी उपस्थित रहे.
302 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा परिसर
डॉ. कल्याणकर ने बताया कि करीब दो एकड़ क्षेत्र में पहले चरण के तहत 302 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना का निर्माण किया जाएगा. परिसर में कई आधुनिक और आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
-अन्नाभाऊ साठे की 20 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा
-उनकी प्रसिद्ध कृति ‘फकीरा’ पर आधारित दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक प्रतिमा
-आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी
-रिसर्च एवं ट्रेनिंग सेंटर
-स्किल डेवलपमेंट सेंटर
-यूपीएससी और एमपीएससी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन केंद्र
-अत्याधुनिक डिजिटल ऑडियो-वीडियो गैलरी
-बच्चों के लिए डिस्कवरी ज़ोन
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से अन्नाभाऊ साठे के विचार देश-विदेश तक पहुंचेंगे और नई पीढ़ी को सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरणा मिलेगी.
246 परिवारों का सम्मानपूर्वक पुनर्वास
परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती थी. एसआरए ने इस दिशा में संवेदनशीलता दिखाते हुए 246 पात्र परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास का निर्णय लिया. पुनर्वास प्रक्रिया में लोगों की पसंद को प्राथमिकता देते हुए उन्हें नए घर उपलब्ध कराए गए. साथ ही विशेष शिविरों के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान भी किया गया. डॉ. कल्याणकर ने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुंबई में एसआरए द्वारा कई अभिनव पुनर्वास परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू की जा रही हैं और भविष्य में भी जनसहभागिता के बल पर पुनर्वास क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए जाएंगे.
सामाजिक परिवर्तन का नया केंद्र बनेगा संस्थान
डॉ. कल्याणकर ने कहा कि अन्नाभाऊ साठे की जयंती की पूर्व संध्या पर उनकी कर्मभूमि में इस परियोजना का शुभारंभ होना पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है. उनके मुताबिक, यह केवल भूमिपूजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, शिक्षा और परिवर्तनवादी विचारों की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. यह संस्थान अन्नाभाऊ साठे के साहित्य, विचार और सामाजिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ शोध, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा.
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