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क्या है संजौली मस्जिद विवाद? जुमे पर सिर्फ एक शख्स ने पढ़ी नमाज, हिंदू संगठनों ने की कार्रवाई की मांग

शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में इक्का-दुक्का नमाजी पहुंचे, क्योंकि मौलियों द्वारा पहले ही जमात में नमाज न पढ़ने की हिदायत दी थी. प्रशासन ने किसी के नमाज पढ़ने पर पाबंदी नहीं लगाई है.

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हिमाचल प्रदेश के संजौली इलाके में अवैध घोषित मस्जिद को लेकर जारी विवाद शुक्रवार को एक बार फिर चर्चा में आया. जुमे की नमाज अदा करने कुछ मुसलमान मस्जिद पहुंचे थे, हालांकि सिर्फ एक शख्स को ही वहां नमाज अदा करने का अवसर प्राप्त हो पाया. उधर, इलाके में हिंदू संगठनों की भूख हड़ताल अब भी जारी है और वे कोर्ट के आदेशों के तहत मस्जिद को गिराने की मांग कर रहे हैं. हालांकि तनाव के बावजूद, दोनों समुदायों ने संयम साधे रखा और क्षेत्र में शांति बनी रही. अब ये मामला हिमाचल हाई कोर्ट में पहुंच गया है, वक्फ बोर्ड ने जिला अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है. आइए जानते हैं क्या है पूरा विवाद?

सिर्फ एक नमाजी ने पढ़ी नमाज


शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में इक्का-दुक्का नमाजी पहुंचे, क्योंकि मौलियों द्वारा पहले ही जमात में नमाज न पढ़ने की हिदायत दी थी. प्रशासन ने किसी के नमाज पढ़ने पर पाबंदी नहीं लगाई है, लेकिन मस्जिद के कानूनी विवाद के चलते मौलवी ने सामूहिक नमाज से परहेज करने की अपील की. एकमात्र स्थानीय निवासी रियासत अली ने अकेले नमाज पढ़ी और मीडिया से चर्चा में साफ किया कि समुदाय, कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा है और अगली कार्रवाई अदालत के आदेशों पर आधारित होगी.​

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क्या है विवाद?


दरअसल, शिमला के मैहली में 2 गुट आपस में भिड़ गए, जिसके बाद पुलिस ने मस्जिद से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इसके अगले दिन ही मस्जिद के बार हिंदू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया. मामला कोर्ट पहुंचा तो 7 सिंतबर, 2024 को शिमला नगर निगम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस बीच प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की लाठीचार्ज ने मामले को और भी गंभीर बना दिया. 5 अक्टूबर, 2024 को नगर निगम आयुक्त ने मस्जिद के 3 मंजिलों को तोड़ने का आदेश दिया. मामला जिला न्यायालय पहुंचा तो मस्जिद को तोड़ने पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद 28 अक्टूबर, 2025 को मामला हाई कोर्ट पहुंचा.

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पूरी तरह अवैध घोषित हुई मस्जिद


उसके बाद मई 2025 में दो अतिरिक्त मंजिलों के लिए डिमोलिशन ऑर्डर आया. मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड की ओर से कोर्ट में दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर पाने के चलते कोर्ट ने मस्जिद को पूरी तरह अवैध करार दिया.​ देवभूमि हिंदू संघर्ष समिति ने प्रशासन के सामने अपनी मांग फिर रखी कि कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन हो तथा मस्जिद की पूरी इमारत गिराई जाए, साथ ही बिजली-पानी की सप्लाई काट दी जाए. संगठन के नेताओं ने कहा कि एक अकेला मुस्लिम नमाजी माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था, उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई.

First published on: Nov 28, 2025 05:15 PM

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Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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