SBI Strike: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने मई महीने के आखिर में दो दिन की राष्ट्रव्यापी यानी देशभर में हड़ताल करने का ऐलान किया है. यूनियन का कहना है कि लंबे समय से बैंक प्रबंधन के साथ बातचीत चल रही थी, लेकिन कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा था. इसी वजह से 25 और 26 मई को देशभर में SBI कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे. यूनियन ने यह भी साफ किया है कि अगर इनमें से कोई दिन सार्वजनिक अवकाश या साप्ताहिक छुट्टी के साथ पड़ता है, तो आंदोलन 27 मई तक जारी रह सकता है.
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क्यों लिया गया हड़ताल का फैसला
AISBISF ने बैंक प्रबंधन के सामने कुल 16 प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा शाखाओं में कर्मचारियों की भारी कमी का बताया गया है. यूनियन के अनुसार पिछले कई सालों से मैसेंजर पदों पर नई भर्ती नहीं हुई है, जबकि क्लर्क कर्मचारियों की संख्या भी लगातार घटती जा रही है. वहीं, दूसरी ओर बैंक शाखाओं में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में यूनियन ने आरोप लगाया कि कई नियमित कार्यों के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. कर्मचारियों का कहना है कि इससे बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं. बता दें कि यह हड़ताल 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947' के प्रावधानों के तहत बुलाई गई है.
यह है कर्मचारियों के मुख्य मुद्दे
- कर्मचारी के ये मुख्य मुद्दे हैं…
- स्टाफ की कमी और बढ़ता वर्कलोड
- पेंशन में बराबरी (Pension Parity)
- बेहतर सर्विस कंडीशंस
- प्रमोशन और ट्रांसफर पॉलिसी में सुधार
- कर्मचारियों के लिए बेहतर वेलफेयर और सिक्योरिटी
क्या हैं कर्मचारियों की 16 बड़ी मांगें?
नीचे पढ़ें SBI कर्मचारियों की मुख्य मांगे क्या हैं;
- कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पेंशन फंड मैनेजर बदलने की आजादी नहीं मिल रही, जो गलत है.नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत कर्मचारियों को अपना 'पेंशन फंड मैनेजर' चुनने की आजादी मिले.
- शाखाओं में स्टाफ की भारी कमी है. पिछले 30 सालों से 'मैसेंजर' जैसे पदों पर भर्ती रुकी हुई है.इससे एक पूरा कर्मचारी वर्ग खत्म हो गया जिसे तुरंत शुरू किए जाने की मांग की गई है.
- यूनियन का कहना है कि बैंक में स्थायी नौकरियों की जगह आउटसोर्सिंग बढ़ रही है, जो कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी के लिए खतरा है.इसे बंद किया जाना चाहिए.
- कर्मचारियों का आरोप है कि12th Bipartite Settlement में 17% सैलरी इंक्रीमेंट तय हुई थी.लेकिन SBI अधिकारियों को स्पेशल पे देकर उनका इंक्रीमेंट करीब 22% हो गया.जबकि वर्कमैन स्टाफ अभी भी 17% पर ही हैं.इससे कर्मचारियों में असमानता की भावना बढ़ रही है.
मई भर चलेगा विरोध प्रदर्शन
हड़ताल से पहले यूनियन ने पूरे मई महीने में चरणबद्ध आंदोलन चलाने की योजना बनाई है. इसके तहत लंच टाइम प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान, धरना, शांतिपूर्ण मार्च और सांसदों व सरकार को ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यूनियन का कहना है कि पिछले दो सालों से लगातार बातचीत के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब आंदोलन तेज करना जरूरी हो गया है. वहीं बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल का असर देशभर की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है, जिससे ग्राहकों को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
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SBI Strike: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने मई महीने के आखिर में दो दिन की राष्ट्रव्यापी यानी देशभर में हड़ताल करने का ऐलान किया है. यूनियन का कहना है कि लंबे समय से बैंक प्रबंधन के साथ बातचीत चल रही थी, लेकिन कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा था. इसी वजह से 25 और 26 मई को देशभर में SBI कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे. यूनियन ने यह भी साफ किया है कि अगर इनमें से कोई दिन सार्वजनिक अवकाश या साप्ताहिक छुट्टी के साथ पड़ता है, तो आंदोलन 27 मई तक जारी रह सकता है.
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क्यों लिया गया हड़ताल का फैसला
AISBISF ने बैंक प्रबंधन के सामने कुल 16 प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा शाखाओं में कर्मचारियों की भारी कमी का बताया गया है. यूनियन के अनुसार पिछले कई सालों से मैसेंजर पदों पर नई भर्ती नहीं हुई है, जबकि क्लर्क कर्मचारियों की संख्या भी लगातार घटती जा रही है. वहीं, दूसरी ओर बैंक शाखाओं में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में यूनियन ने आरोप लगाया कि कई नियमित कार्यों के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. कर्मचारियों का कहना है कि इससे बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं. बता दें कि यह हड़ताल ‘इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947’ के प्रावधानों के तहत बुलाई गई है.
यह है कर्मचारियों के मुख्य मुद्दे
- कर्मचारी के ये मुख्य मुद्दे हैं…
- स्टाफ की कमी और बढ़ता वर्कलोड
- पेंशन में बराबरी (Pension Parity)
- बेहतर सर्विस कंडीशंस
- प्रमोशन और ट्रांसफर पॉलिसी में सुधार
- कर्मचारियों के लिए बेहतर वेलफेयर और सिक्योरिटी
क्या हैं कर्मचारियों की 16 बड़ी मांगें?
नीचे पढ़ें SBI कर्मचारियों की मुख्य मांगे क्या हैं;
- कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पेंशन फंड मैनेजर बदलने की आजादी नहीं मिल रही, जो गलत है.नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत कर्मचारियों को अपना ‘पेंशन फंड मैनेजर’ चुनने की आजादी मिले.
- शाखाओं में स्टाफ की भारी कमी है. पिछले 30 सालों से ‘मैसेंजर’ जैसे पदों पर भर्ती रुकी हुई है.इससे एक पूरा कर्मचारी वर्ग खत्म हो गया जिसे तुरंत शुरू किए जाने की मांग की गई है.
- यूनियन का कहना है कि बैंक में स्थायी नौकरियों की जगह आउटसोर्सिंग बढ़ रही है, जो कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी के लिए खतरा है.इसे बंद किया जाना चाहिए.
- कर्मचारियों का आरोप है कि12th Bipartite Settlement में 17% सैलरी इंक्रीमेंट तय हुई थी.लेकिन SBI अधिकारियों को स्पेशल पे देकर उनका इंक्रीमेंट करीब 22% हो गया.जबकि वर्कमैन स्टाफ अभी भी 17% पर ही हैं.इससे कर्मचारियों में असमानता की भावना बढ़ रही है.
मई भर चलेगा विरोध प्रदर्शन
हड़ताल से पहले यूनियन ने पूरे मई महीने में चरणबद्ध आंदोलन चलाने की योजना बनाई है. इसके तहत लंच टाइम प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान, धरना, शांतिपूर्ण मार्च और सांसदों व सरकार को ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यूनियन का कहना है कि पिछले दो सालों से लगातार बातचीत के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब आंदोलन तेज करना जरूरी हो गया है. वहीं बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल का असर देशभर की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है, जिससे ग्राहकों को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
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