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गुजरात

गुजरात नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को बड़ा झटका, नहीं बचा पाई विपक्ष नेता का पद

गुजरात निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जहां कई महानगरपालिकाओं में उसे नेता प्रतिपक्ष का पद भी खोना पड़ सकता है. ‘मावलंकर रूल’ के अनुसार कम सीटों और वोट शेयर के चलते कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति स्थानीय निकायों में कमजोर होती दिख रही है.

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Written By: bhupendra.thakur Updated: Apr 30, 2026 15:03

निकाय चुनाव के नतीजों के बाद गुजरात की नगरपालिका की राजनीति में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. 15 महानगरपालिकाओं सत्ता से दूर रही कांग्रेस ज्यादातर महानगरपालिकाओं में विपक्ष नेता का पद तक नहीं बचा पाई.

नतीजों के बाद कांग्रेस की स्थिति इतनी ख़राब है कि 15 में से 10 महानगरपालिकाओं में कांग्रेस आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष का पद भी खो सकती है. इसकी वजह है लोकसभा के पहले अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर द्वारा बनाया गया ‘मावलंकर रूल’, जिसके अनुसार विपक्षी दल को कुल सीटों का कम से कम 10 प्रतिशत हासिल होना जरूरी है. और फ़िलहाल के नतीजों में सिर्फ अहमदाबाद ,वापी, भावनगर, आणंद और गांधीधाम में ही कांग्रेस ने 10 फीसदी या उससे ज्यादा वोट हासिल किये है. ऐसे में इन 5 के सिवाय की बाकी 10 महानगरपालिका में नेता प्रतिपक्ष को मिलने वाले अलग कार्यालय, स्टाफ, सरकारी वाहन और भत्ते जैसी सुविधाओं से कांग्रेस को हाथ धोना पड़ सकता है.

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हालांकि राजकोट में पहले लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए कम सीटों के बावजूद यह पद दिया जाता था, लेकिन अब राजनीती बदल चुकी है और मौजूदा हालात में सिर्फ 5 महानगरपालिकाओं में ही कांग्रेस यह पद बचा पाएगी.

अब देखना ये होगा कि क्या आने वाले समय में नगरपालिकाओं में भी ‘मावलंकर रूल’ सख्ती से लागू किया जाएगा तो कांग्रेस का क्या होगा.

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First published on: Apr 30, 2026 03:03 PM

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