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थप्पड़ मारने पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, रद्द हुई 7 साल की सजा, पढ़ें क्या है गुजरात का मामला?

Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट ने आज 30 साल से चल रहे केस का निपटारा किया है, जिसमें एक पति को 7 साल की सजा हुई थी। मामला सिर्फ एक थप्पड़ का था, जो उसने पत्नी को मारा था और इस एक थप्पड़ ने दोनों की शादीशुदा जिंदगी बर्बाद कर दी।

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Gujarat High Court News: आजकल गुजरात हाईकोर्ट का एक केस पूरे भारत में चर्चित है। वहीं इस केस में आया फैसला मामले से भी ज्यादा सुर्खियों में है। केस एक पति के द्वारा पत्नी को थप्पड़ मारने का था, जो 30 साल से हाईकोर्ट में चल रहा था। इस केस में पति को 7 साल की सजा हुई थी, लेकिन जस्टिस गीता ने पीड़ित पति को राहत देते हुए बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया और मामले की निपटारा कर दिया। लेकिन इस केस ने दोनों की जिंदगी बर्बाद कर दी।

एक थप्पड़ मार देना क्रूरता नहीं

जस्टिस गीता ने फैसला सुनाया कि पत्नी को एक थप्पड़ मार देना क्रूरता नहीं है। क्रूरता हुई है, यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत होना चाहिए, जो अदालत को वैलिड लगेगा, तभी आरोपी पर कार्रवाई की जाएगी। वरना मामले में कोई आरोपी नहीं और न ही इसमें कोई पुलिस केस दर्ज हो सकता है। निचली अदालत को पति को 7 साल की जेल की सजा सुनाते हुए सबूतों पर विचार करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए पति को बरी और सजा रद्द की जाती है।

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30 साल पुराना मामला क्या था?

हाईकोर्ट में 30 साल पहले वर्ष 1996 में एक याचिका दायर की गई थी। पीड़ित पति का नाम दिलीपभाई मंगलाभाई वरली है। उन्होंने याचिका में बताया कि उनकी पत्नी बार-बार बताए बिना मायके चली जाती थी। इससे उसे और उसके परिवार को काफी परेशानी होनी पड़ती थी। एक दिन वजह पूछने पर पत्नी भड़क गई और लड़ाई करने लगी तो उसने उस एक थप्पड़ मार दिया। इसके बाद पत्नी ने पुलिस केस दर्ज करा दिया और निचली अदालत ने सजा सुना दी।

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महिला का मारपीट करने का आरोप

महिला पक्ष ने आरोप लगाया कि वह पत्नी को हर रोज मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़िता करता था। उसके साथ हर रोज मारपीट करता था। प्रताड़ना से तंग आकर पत्नी ने आत्महत्या की थी। पति ने ही उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया था। पति ज्यादा पैसा कमाने के लिए रात में बैंजो बजाने जाता था, जो पत्नी को पसंद नहीं था और इस वजह से उनकी लड़ाई होती थी, जो मारपीट तक पहुंच जाती थी। रोज-रोज की मारपीट से तंग आकर पत्नी ने जान दे दी।

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दिलीपभाई ने बताया कि साल 2003 में सेशन कोर्ट ने उसे धारा 306 के तहत 7 साल की जेल की सजा सुना दी। इसी फैसले का उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी तो जस्टिस गीता ने इंसाफ कर दिया।

First published on: Feb 21, 2026 11:48 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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