हद है… गुजरात में बीजेपी विधायक को डिजिटल अरेस्ट की कोशिश, MLA ने दिया ये जवाब

गुजरात में बदमाशों ने ठगी की हदें पार कर दीं। इस बार एक विधायक को ही डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश की। हालांकि विधायक योगेश पटेल की सक्रियता के चलते बदमाश अपने मंसूबे में नाकामयाब हो गए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

BJP MLA Menjalpur Yogesh Patel
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अपराधियों के हौंसले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। डिजिटल युग में बदमाश डिजिटल अरेस्ट के हथियार को काफी प्रयोग करने लगे हैं। अब इन बदमाशों के निशाने पर आम आदमी ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी आने लगे हैं। ऐसा मामला गुजरात से आया है। गुजरात के वडोदरा शहर में साइबर ठगों ने बीजेपी के के वरिष्ठ नेता और मेंजलपुर विधायक योगेश पटेल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगने की कोशिश की। खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताने वाले ठग ने फोन पर विधायक के खिलाफ गंभीर केस दर्ज होने का झांसा देकर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन पटेल की सूझबूझ से यह प्रयास नाकाम हो गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विधायक योगेश पटेल को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने गुजराती भाषा में बातचीत करते हुए अपना परिचय मुंबई पुलिस के अधिकारी के रूप में दिया। कॉलर ने दावा किया कि विधायक का नाम एक आपराधिक मामले में सामने आया है और उनके खिलाफ ‘डिजिटल अरेस्ट’ की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

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कॉलर ने कथित नोटिस, केस और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर वीडियो कॉल पर आने और आगे की बात वहीं करने का दबाव बनाया, जैसा कि हाल के दिनों में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के मामलों में देखा जा रहा है। हालांकि, बातचीत के दौरान ही विधायक को शक हो गया कि यह कोई संगठित साइबर गिरोह का सदस्य हो सकता है। बताया जाता है कि धमकाने के अंदाज़ में बात कर रहे कॉलर को विधायक योगेश पटेल ने शांत लेकिन सख्त लहजे में जवाब देते हुए कहा कि “तू जिस स्कूल में पढ़ा है, उसका मैं प्रिंसिपल रह चुका हूं।” यह सुनते ही कॉलर घबरा गया और तुरंत कॉल काट दी।

बता दें कि राजनीति में आने से पहले योगेश पटेल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और वर्षों तक स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। पुलिस लोगों से अपील करके ऐसे मामलों में जागरुक रहने की अपील करती रहती है। साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल के माध्यम से घंटों तक कई दिनों तक ऑनलाइन “नजरबंद” रखते हैं।इस दौरान पीड़ित को झूठे केस, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स के आरोपों का डर दिखाकर बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है।

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