MCD की पार्किंग में धूल खा रहे 75 इलेक्ट्रिक वाहन, करोड़ों का निवेश बना कबाड़?

दिल्ली नगर निगम (MCD) की पार्किंग में पिछले काफी समय से 75 इलेक्ट्रिक वाहन बेकार खड़े हैं. करीब 7.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए इन वाहनों को अब डिस्पोज करने की तैयारी है. इस मामले ने सरकारी योजनाओं के कॉर्डिनेशन, सार्वजनिक धन के उपयोग और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

MCD Electric Vehicles

Credit: AI

दिल्ली में एक ओर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर Municipal Corporation of Delhi (MCD) की पार्किंग में खड़े 75 इलेक्ट्रिक वाहन सरकारी योजनाओं के कॉर्डिनेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. ये वाहन पिछले काफी समय से खराब हालत में खड़े हैं और अब निगम ने इन्हें डिस्पोज करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है. जानकारी के मुताबिक, MCD ने साल 2018 में अपने पारंपरिक सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का निर्णय लिया था. इसके लिए एक प्राइवेट कंपनी ESSL के साथ एग्रीमेंट किया गया था. योजना के तहत 2022 से 2024 के बीच इन वाहनों का संचालन भी किया गया, लेकिन अब ये वाहन निगम की पार्किंग में धूल फांकते नजर आ रहे हैं.

विज्ञापन
विज्ञापन

ड्राइवर्स का क्या कहना है?

इन वाहनों को चलाने वाले ड्राइवरों का कहना है कि ज्यादातर गाड़ियां अभी भी पूरी तरह कबाड़ नहीं हुई हैं. कुछ वाहन 40,000 से 50,000 किलोमीटर तक चल चुके हैं. उनका दावा है कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद वो रोज इस उम्मीद में आते हैं कि शायद सरकार या निगम दोबारा संचालन शुरू करने का फैसला करे, जिससे उनकी नौकरी भी वापस मिल सके और ये वाहन फिर से सड़कों पर उतर सकें. इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है. बीजेपी के नेताओं ने इसके लिए पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. दिल्ली के मेयर परवेश वाही का कहना है कि ये मामला अब उनके संज्ञान में आया है और जल्द ही इन वाहनों के भविष्य को लेकर फैसला लिया जाएगा.

क्या था एग्रीमेंट?

जानकारी के मुताबिक, ESSL और MCD के बीच पांच साल का एग्रीमेंट हुआ था. इस व्यवस्था के तहत एक वाहन के संचालन, ड्राइवर की सैलरी और रखरखाव के लिए MCD को लगभग 60 हजार रुपये प्रति वाहन भुगतान करना था. अनुमानित तौर पर एक इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत करीब 10 लाख रुपये थी. इस हिसाब से 75 वाहनों की कुल कीमत लगभग 7.5 करोड़ रुपये बैठती है. ये इलेक्ट्रिक वाहन कभी दिल्ली में स्वच्छ और ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखे गए थे. लेकिन रखरखाव, संचालन और समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण ये वाहन अब कबाड़ में तब्दील होते दिखाई दे रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन वाहनों पर खर्च हुए पैसे की जवाबदेही कौन तय करेगा और आखिर करोड़ों रुपये की इस परियोजना का फायदा जनता तक क्यों नहीं पहुंच सका.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ