भरत तिवारी मौत मामले में बड़ा एक्शन, SDPO-SHO समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज

Bharat Bhushan Tiwari: आशा देवी का दावा है कि जब भरत वहां पहुंचा, तो उसने फेसबुक पर लाइव आकर विस्थापितों की मांगें उठाईं. इसके तुरंत बाद उसने अपने पास मौजूद हथियार को जमीन पर फेंक दिया और कानून के समक्ष पूरी तरह सरेंडर कर दिया.

Bharat Bhushan Tiwari

सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इन दिनों बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की चर्चा जोरों पर है. अब घटना के सातवें दिन कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर मामले में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. लगातार बढ़ते दबाव और गंभीर आरोपों के बीच पुलिस ने आखिरकार अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है. शाहपुर थाने में दर्ज FIR में जगदीशपुर के SDPO राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) राजेश कुमार मालाकार सहित तीन से चार अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है.

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FIR में पुलिस के ऊपर लगाए गए गंभीर आरोप


यह कार्रवाई मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर की गई है. इस पूरे मामले में अब तक यह चौथी एफआईआर है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. मृतक की मां आशा देवी ने पुलिस महानिरीक्षक और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राज को सौंपे गए आवेदन में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत के अनुसार, 17 जून की सुबह करीब 8 बजे जगदीशपुर SDPO के नेतृत्व में शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे. पुलिस टीम ने भरत तिवारी से कहा कि वह जवइनियां गांव के बाढ़ विस्थापितों के शिविर में उनके साथ चले, ताकि वहां रह रहे लोगों की समस्याओं और मांगों को समझा जा सके.

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चारों तरफ से घेरकर मारी गोली!


आशा देवी का दावा है कि जब भरत वहां पहुंचा, तो उसने फेसबुक पर लाइव आकर विस्थापितों की मांगें उठाईं. इसके तुरंत बाद उसने अपने पास मौजूद हथियार को जमीन पर फेंक दिया और कानून के समक्ष पूरी तरह सरेंडर कर दिया. आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और जगदीशपुर SDPO के सीधे आदेश पर पुलिसकर्मियों ने भरत पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां दाग दीं. गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस उसे अपने साथ लेकर चली गई.

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परिजनों को बंधक बनाने और सच छिपाने का दावा


पीड़ित परिवार ने पुलिसिया कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस कथित मुठभेड़ के बाद भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को दिनभर शाहपुर थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया. शाम के वक्त परिवार को अचानक सूचना दी गई कि भरत की मौत हो चुकी है. इस मामले में लगातार मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी स्तर पर उठे सवालों के बाद आखिरकार प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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