बिहार की नई सरकार का आज फ्लोर टेस्ट है। आज सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली BJP सरकार को विधानसभा में बहुमत पेश करना है। इसके लिए बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसके लिए BJP के विधायक पश्चिम बंगाल से लौट आए हैं। सुबह 11 बजे विधानसभा सत्र लगेगा, जिसमें सम्राट चौधरी विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करेंगे। प्रस्ताव पर विधायक वोट देंगे और वोट गिनने के बाद बहुमत है या नहीं, इसका ऐलान किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सम्राट चौधरी को बहुमत साबित करने की परेशानी नहीं है। 243 विधायकों वाली बिहार विधानसभा में 242 विधायक हैं, क्योंकि नितिन नबीन के BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण एक सीट खाली हुई है। बिहार विधानसभा में NDA गठबंधन के 201 विधायक तो बहुमत मिल जाएगा। सम्राट चौधरी को बहुमत साबित करने के लिए 122 विधायकों का समर्थन दिखाना होगा।
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विधानसभा की दलगत स्थिति
राजग (कुल 201)
भाजपा: 88
जदयू: 85
लोजपा (आर): 19
हम: 5
रालोमो: 4
विपक्ष (कुल 41)
राजद: 25
कांग्रेस: 6
AIMIM: 5
वाम दल: 3
IPP: 1
बसपा: 1
क्यों पड़ी फ्लोर टेस्ट की जरूरत?
विधानसभा या लोकसभा चुनाव जीतने के बाद स्पष्ट बहुमत से देशभर की जनता के सामने सरकार का गठन किया जाता है, लेकिन जब अचानक एक सरकार के कार्यकाल के बीच में किसी दूसरी पार्टी की सरकार बनती है तो उस नई सरकार के मुखिया को बहुमत साबित करना पड़ता है कि उसके पक्ष में कितने विधायक या सांसद हैं? क्योंकि नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद JDU की बजाय BJP ने बिहार में नई सरकार बनाई है तो बिहार के नए मुखिया को अपने समर्थन में NDA के विधायकों का बहुमत साबित करना पड़ेगा।
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क्या होता है फ्लोर टेस्ट, कैसे करते?
बता दें कि फ्लोर टेस्ट एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत विधानसभा या लोकसभा में बहुमत साबित किया जाता है। देश के प्रधानमंत्री या प्रदेश के मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को यह साबित करना पड़ता है कि लोकसभा या विधानसभा में उसे कितने विधायकों या सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत साबित करने की प्रक्रिया को ही फ्लोर टेस्ट कहते हैं। इसके लिए सदन का विशेष सत्र बुलाकर मतदान कराया जाता है, जिसमें विधायक ओर सांसद ‘हां’ या ‘ना’ में वोट डालने हैं। वहीं अगर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बहुमत साबित करने में विफल रहते हैं तो उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ता है।










