हिमालय की चोटियों से आई डरावनी रिपोर्ट! 160 करोड़ लोगों की जिंदगी पर मंडराया खतरा, वैज्ञानिकों ने दी ये बड़ी चेतावनी

Mountain Vegetation: वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय की चोटियों पर तापमान बढ़ने और बर्फ कम होने से हरियाली तेजी से ऊपर बढ़ रही है, जिससे जल चक्र बिगड़ने और 160 करोड़ लोगों पर जल संकट का खतरा है.

Himalayan Greenery Expansion

हिमालय से कौन सी बुरी खबर आई है?

Mountain Vegetation: एशिया की छत कहे जाने वाले हिमालय क्षेत्र से अब तक जलवायु परिवर्तन को लेकर केवल ग्लेशियरों के पिघलने की खबरें ही सामने आती थीं. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक नए और बेहद गंभीर खतरे की तरफ इशारा किया है, जो दूर से देखने में बेहद खूबसूरत पर असल में बहुत खतरनाक है. यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सटर के नेतृत्व में किए गए एक नए रिसर्च के मुताबिक साल 1999 से 2022 के बीच हिमालय के छह अलग-अलग क्षेत्रों में पेड़-पौधों का दायरा तेजी से ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है. बढ़ती गर्मी और बर्फ की घटती गहराई के कारण पहाड़ों पर लगातार हरियाली बढ़ रही है. पहली नजर में यह प्रकृति के सुधार का संकेत लग सकता है, लेकिन इस नाजुक पहाड़ी माहौल में अत्यधिक ऊंचाई पर पौधों का उगना बर्फ के जमाव, पानी के बहाव और नदियों के व्यवहार को पूरी तरह से बिगाड़ सकता है, जिसका सीधा असर नीचे रहने वाले करोड़ों लोगों पर पड़ेगा.

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क्यों तेजी से ऊंचाई की तरफ बढ़ रही है पौधों की सीमा?

इस विशेष स्टडी में वैज्ञानिकों ने अल्पाइन ‘वेजिटेशन लाइन’ यानी उस ऊपरी सीमा की जांच की है जहां तक पौधे लगातार उग सकते हैं. लद्दाख से लेकर भूटान तक के क्षेत्रों में किए गए अध्ययन में पाया गया कि हर जगह पौधे पहले के मुकाबले काफी ऊपर तक पहुंच रहे हैं. एवरेस्ट के खुंबू क्षेत्र में यह पौधों की सीमा लगभग 4.7 फीट प्रति वर्ष और नेपाल के मंथांग में तो यह 22.8 फीट प्रति वर्ष की हैरान करने वाली रफ्तार से ऊपर बढ़ रही है. दो दशकों से अधिक समय में हुए इस बदलाव ने प्रकृति के पुराने पैमानों को पूरी तरह बदल दिया है. जो पथरीले और बर्फीले इलाके पहले अत्यधिक ठंड के कारण पौधों के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं थे, वहां अब कम होती बर्फबारी के कारण पौधों को जड़ जमाने, पत्तियां फैलाने और खुद को विकसित करने के लिए लंबा समय मिल रहा है.

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क्यों हिमालय में बढ़ रही है हरियाली और भूरेपन?

वैज्ञानिकों ने इस बड़े बदलाव को दर्ज करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों और लंबे समय के मौसम के आंकड़ों का सहारा लिया है. इस रिसर्च में ग्रीनिंग (हरियाली का बढ़ना) और ब्राउनिंग (भूरेपन या झाड़ियों का बढ़ना) दोनों के मिलेजुले संकेत मिले हैं. हिमालय के अधिकांश हिस्सों में हरियाली बढ़ने का चलन ज्यादा देखा गया है, लेकिन खुंबू और भूटान जैसे पूर्वी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूरापन भी दर्ज किया गया है. यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घास, छोटे पौधे और जंगली झाड़ियां बर्फ और मिट्टी के साथ अलग-अलग तरह से व्यवहार करते हैं. दूर से सब कुछ हरा-भरा दिख सकता है, लेकिन पास से देखने पर पता चलता है कि पहाड़ों का पूरा इकोसिस्टम बदल रहा है. अत्यधिक ठंड में रहने वाले पुराने पौधों की जगह अब कम ठंड वाले नए पौधे ले रहे हैं, जिससे स्थानीय जैव विविधता संकट में आ गई है.

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160 करोड़ लोगों पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

पहाड़ों पर आ रहा यह बदलाव सिर्फ ऊंचाई तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. इसी रिसर्च टीम के पिछले काम के अनुसार हिमालय के इस बदलते जल-पारिस्थितिकी तंत्र पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि दुनिया की लगभग 1.6 अरब (160 करोड़) आबादी अपनी पानी की जरूरतों के लिए इन्हीं पहाड़ों पर निर्भर है. सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदियां केवल नक्शे के नाम नहीं हैं, बल्कि ये दक्षिण एशिया के अनगिनत खेतों, शहरों और जलाशयों को जीवन देती हैं. जब ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ के पिघलने और पानी के जमा होने का समय बदल जाएगा, तो इसका सीधा असर निचले इलाकों की खेती और पेयजल आपूर्ति पर पड़ेगा. यह कोई रातों-रात एवरेस्ट पर जंगल उगने का दावा नहीं है, बल्कि यह पानी के बहाव और समय के उस असंतुलन की गंभीर चेतावनी है जिसे ‘हरे जैकेट में पानी का संकट’ कहा जा सकता है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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