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Religion

Vidur Niti: इंसान के रूप में कौन है गीदड़? जानें किन लोगों को विदुर नीति में कहा गया है धरती पर बोझ

Vidur Niti: हजारों साल पुरानी विदुर नीति आज के समय में भी प्रासंगिक है. कुछ मनुष्य इंसान नहीं गीदड़ होते हैं, यह केवल आलोचना नहीं, बल्कि चेतावनी है. यह सही आचरण अपनाने का संदेश देती है. आइए जानते हैं, विदुर नीति में क्यों कुछ इंसान को धरती पर बोझ बताया गया है?

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Written By: Shyamnandan Updated: Feb 19, 2026 11:43
Vidur-Niti

Vidur Niti: महाभारत काल में एक ऐसा नाम मिलता है जो सत्ता में रहकर भी सत्य के साथ खड़ा रहा. यह नाम है विदुर. वे हस्तिनापुर के महामंत्री थे. जन्म से राजपरिवार में नहीं थे, लेकिन बुद्धि, नीति और धर्मज्ञान में सबसे आगे थे. उन्हें धर्मराज का अंश माना जाता है. उन्होंने राजा धृतराष्ट्र को बार-बार सही और नैतिक सलाह दी. उन्होंने अनीति और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई. यही शिक्षाएं आगे चलकर विदुर नीति के नाम से प्रसिद्ध हुईं. विदुर नीति महाभारत के उद्योग पर्व में मिलती है. इसमें जीवन, राजनीति, धन, आचरण और धर्म पर गहरी बातें कही गई हैं. सरल शब्दों में कहें तो यह एक नैतिक मार्गदर्शिका है.

इंसान के रूप में गीदड़ कौन?

विदुर ने कुछ लोगों की तुलना गीदड़ से की है. यहां गीदड़ का अर्थ डरपोक और नीच प्रवृत्ति वाले व्यक्ति से है. वे कहते हैं कि जो लोग कभी दान नहीं देते, वे समाज के लिए व्यर्थ हैं. धन केवल अपने लिए जमा करना, विदुर के अनुसार, अधर्म है. जो लोग वेद और शास्त्रों से द्वेष रखते हैं, ज्ञान का अपमान करते हैं, वे भी इसी श्रेणी में आते हैं. विदुर मानते हैं कि ज्ञान से दूरी मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है.

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सेवा से मुंह मोड़ने वाले

विदुर साफ कहते हैं कि जो व्यक्ति माता-पिता और आचार्य की सेवा नहीं करता, वह भी गीदड़ समान है. भारतीय परंपरा में माता-पिता और गुरु को उच्च स्थान दिया गया है. उनकी उपेक्षा को विदुर ने गंभीर दोष माना है.

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गलत कमाई और झूठा अभिमान

जो व्यक्ति आजीविका के लिए गलत रास्ता अपनाता है, छल या बेईमानी से धन कमाता है, वह भी निंदनीय है. विदुर के अनुसार ऐसा धन टिकता नहीं और सम्मान भी नष्ट करता है. वे यह भी कहते हैं कि जिसने जीवन में कभी तीर्थयात्रा का प्रयास नहीं किया, आत्मचिंतन नहीं किया, और फिर भी अहंकार से सिर ऊंचा रखता है, वह भी गीदड़ समान है. यहां तीर्थ का अर्थ केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि से भी है.

धरती पर बोझ क्यों?

विदुर नीति के अनुसार जो व्यक्ति न दान करता है, न सेवा, न धर्म का पालन, और फिर भी अभिमान से भरा रहता है, वह समाज पर बोझ है. उन्होंने ऐसे आचरण को बेहद नीच बताया है. ऐसे इंसान के होने या न होने से समाज में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 19, 2026 11:21 AM

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