हनुमान जी ने जब पाताल लोक में अहिरावण का सामना किया, तो वहां उन्हें पांच दीपक दिखाई दिए, जिन्हें अहिरावण ने मां भवानी के लिए अलग-अलग दिशाओं में जलाया था। इन पांचों दीपकों को एक साथ बुझाना आवश्यक था, तभी अहिरावण का वध संभव था। इसलिए हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया।
पंचमुखी हनुमान के मुख और उनके दिशा अनुसार महत्व इस प्रकार है: पूर्व में हनुमान मुख (शक्ति और साहस का प्रतीक), उत्तर में वराह मुख (संकट और भय दूर करने वाला), दक्षिण में नरसिंह मुख (राक्षसों का संहार करने वाला), पश्चिम में गरुड़ मुख (दुश्मनों पर विजय पाने वाला), और आकाश की ओर हयग्रीव मुख (ज्ञान और बुद्धि का दाता)। इस रूप के माध्यम से हनुमान जी ने पाँचों दीपकों को एक साथ बुझाया और अहिरावण का वध संभव किया।
इसके बाद हनुमान जी ने राम-लक्ष्मण को अहिरावण से मुक्त किया। पंचमुखी रूप का उपयोग दानव मरियल को मारने के लिए भी किया गया। इस प्रकार, पंचमुखी हनुमान का रूप शक्ति, बुद्धि, साहस और रक्षा का अद्वितीय संयोजन प्रस्तुत करता है।











