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यूपी में 64 साल के शख्स ने जीते जी कर डाली खुद की तेरहवीं, भोज में 1900 लोगों को बुलाया

मरने के बाद कौन पूछेगा?" इसी डर से यूपी के औरैया में 64 साल के बुजुर्ग ने जीते जी अपनी 'तेरहवीं' कर डाली. 1900 लोगों को दावत दी और मजदूरी के पैसों से खुद का मृत्यु भोज खिलाया. रिश्तों की कड़वी सच्चाई बयां करती यह खबर आपको झकझोर देगी. पत्रकार अवधेश मिश्रा की रिपोर्ट.

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Edited By : Vijay Jain Updated: Apr 1, 2026 13:21
auraiya man celebrates his own terahvin

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक 64 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी मौत का इंतजार करने के बजाय जीते जी अपनी ‘तेरहवीं’ का भोज आयोजित कर डाला. इस कार्यक्रम में उन्होंने बाकायदा 1900 लोगों को आमंत्रित किया और उन्हें भरपेट भोजन कराया. इस ‘जिंदा तेरहवीं’ की चर्चा अब पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई है. यह हैरान कर देने वाला कदम उठाने वाले शख्स का नाम राकेश यादव है. राकेश का कहना है कि परिवार में अब उनका साथ देने वाला कोई नहीं है भाइयों की मौत हो चुकी है और बहन शादीशुदा है ऐसे में उन्हें अपने अंतिम संस्कार और तेरहवीं की चिंता सता रही थी इसी कारण उन्होंने यह फैसला लियाउन्होंने अपना घर भी एक रिश्तेदार को दे दिया है और अब साधारण झोपड़ी में रह रहे हैं उनका कहना है कि उन्हें किसी पर भरोसा नहीं कि मरने के बाद कोई जिम्मेदारी निभाएगा.

मेहनत की कमाई से खिलाया सबको खाना

राकेश यादव के इस आयोजन में किसी तरह की धार्मिक क्रिया नहीं होगी केवल भोज कराया जा रहा है जो उनकी मेहनत की कमाई और पेंशन से हो रहा है. आज के दौर में बुढ़ापे में उनका साथ देने वाला कोई नहीं है. उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि उनकी मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा और क्या कोई उनकी तेरहवीं की रस्म निभाएगा? रिश्तों पर से उठते भरोसे और अकेलेपन ने उन्हें यह अनोखा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया.

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उन्होंने बताया कि उन्हें रिश्तेदारों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है कि वे भविष्य में उनकी जिम्मेदारी उठाएंगे. उन्होंने इस ‘जिंदा तेरहवीं’ के लिए किसी से मदद नहीं मांगी. राकेश को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन और सालों की मेहनत-मजदूरी से बचाए गए एक-एक पैसे को जोड़कर उन्होंने इस भव्य भंडारे का खर्च उठाया.

इलाके में चर्चा का विषय

इस अनोखे आयोजन में भारी संख्या में लोग पहुंचे. लोगों के लिए पूड़ी-सब्जी और हलवे का इंतजाम किया गया था. इस आयोजन के लिए बाकायदा निमंत्रण पत्र बांटे गए थे. भंडारे में 1900 लोगों का जुटना और एक जीवित व्यक्ति द्वारा खुद की तेरहवीं मनाना पूरे औरैया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मौजूद मेहमानों के लिए यह अनुभव काफी अलग था. एक तरफ दावत की खु्शी तो दूसरी तरफ एक अजीब सा सन्नाटा कि यह आयोजन एक जीवित व्यक्ति की ‘तेरहवीं’ का है.

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First published on: Apr 01, 2026 11:55 AM

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