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Vat Savitri Vrat: साल में 2 बार क्यों रखा जाता है वट सावित्री व्रत? जानें कारण, महत्व और लाभ

Vat Savitri Vrat: साल में दो बार वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इसे पढ़ने के बाद कुछ लोग हैरान हो सकते हैं, लेकिन ये सच है. चलिए जानते हैं एक वर्ष में दो बार वट सावित्री व्रत रखने के कारण, महत्व और लाभ आदि के बारे में.

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Vat Savitri Vrat: विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत खास होता है, जो कि पति की लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है. हालांकि, आज के बदलते दौर में अविवाहित कन्याएं भी योग्य वर पाने के लिए वट सावित्री व्रत रख रही हैं. इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ माता सावित्री और वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा भी की जाती है. हालांकि, साल में केवल एक बार नहीं, बल्कि दो बार वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इन दोनों ही तिथियों पर व्रत रखने का अपना महत्व और कारण है.

आज यहां पर आप जानेंगे कि साल में दो बार क्यों रखा जाता है वट सावित्री व्रत. साथ ही आप इन दोनों तिथियों पर रखे जाने वाले व्रत की तिथि और अन्य जरूरी बातों के बारे में जानेंगे.

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वट सावित्री व्रत दो क्यों?

हर साल ज्येष्ठ माह में दो बार वट सावित्री व्रत रखा जाता है. पहला व्रत अमावस्या तिथि को रखा जाता है, जबकि दूसरे व्रत की पूजा पूर्णिमा तिथि पर होती है. बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान आदि उत्तर भारत में पूर्णिमांत कैलेंडर को लोग अहमियत देते हैं, जिसके आधार पर हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर वट सावित्री का व्रत रखा जाता है.

गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल, गोवा और तमिलनाडु आदि पश्चिम व दक्षिण भारत में अमांत कैलेंडर के आधार पर पूर्णिमा तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है.

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कौन सी तिथि का व्रत ज्यादा फलदायी है?

भविष्य पुराण में अमावस्या से ज्यादा पूर्णिमा तिथि पर वट सावित्री व्रत रखने का महत्व बताया गया है. हालांकि, कुछ प्राचीन धर्मग्रंथों में अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखने को अतिलाभकारी व शुभ माना गया है. ऐसे में ये कहा जाता है कि दोनों ही तिथियों पर वट सावित्री व्रत रखने का फल समान मिलता है.

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यदि किसी कारण से आप अमावस्या तिथि पर व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो पूर्णिमा पर रख सकते हैं. बता दें कि सबसे पहले ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है, जिसके करीब 15 दिन बाद ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर कई भक्त वट सावित्री व्रत रखते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: May 15, 2026 01:59 PM

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About the Author

Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में न्यूज राइटिंग से की थी, जिसके बाद देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर व्यापक अध्ययन किया. अब पिछले 4 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन में काम कर रही हैं.

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