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Religion

Gita Quotes: भगवान श्रीकृष्ण की चेतावनी, गीता के अनुसार ये हैं बर्बादी के 6 कारण, समय रहते हो जाएं सावधान

Gita Quotes: भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मनुष्य के पतन के गहरे संकेत दिए हैं, जो भीतर छिपे होते हैं। हम बाहरी नहीं, अपने अंदर के दोषों से ज्यादा प्रभावित होते हैं जो धीरे-धीरे बर्बादी लाते हैं। आइए जानते हैं, गीता के अनुसार बर्बादी के 6 कारण क्या हैं?

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Written By: Shyamnandan Updated: Apr 21, 2026 17:10
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Gita Quotes: भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मनुष्य के पतन के सटीक लक्षण बताए हैं। वो सिर्फ उपदेश नहीं, बल्कि समय रहते सचेत होने की चेतावनी है। हम अक्सर बाहरी दुश्मनों से डरते हैं, पर असली बर्बादी हमारे भीतर बसती है। जानिए, वो कौन से 6 कारण हैं जो चुपचाप सब कुछ लूट लेते हैं।

गीता के अनुसार ये हैं बर्बादी के 6 कारण

नींद का काला जादू

बहुत ज्यादा सोना मौत को बुलावा देने जैसा है। श्रीकृष्ण कहते हैं, अत्यधिक निद्रा अवसरों को सोते रहने का नाम है। जब आप ज्यादा सोते हैं, तो समय आपको सुला देता है। थोड़ी नींद में ही वो ताकत है, जो दुनिया जीतने के लिए काफी है।

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थकान का झूठा एहसास

बिना काम किए थकान मानसिक जाल है। यह आपको बताती है कि अब और नहीं होगा, जबकि शरीर में अभी अपार ऊर्जा बाकी है। गीता सिखाती है – उत्साह ही प्रगति की जड़ है। अगर मन थका है, तो शरीर को मत दोष देना।

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डर की बेड़ियां

भविष्य के डर से आज का फैसला रोक लेना, खुद को जीवित रहते मार देना है। कृष्ण कहते हैं, डर कायरों का साथी है। विपरीत हालात में भी अगर संकल्प दृढ़ हो, तो डर अपने आप भाग जाता है। जो डर गया, वो मर गया – यह गीता का सीधा सूत्र है।

क्रोध की आग

गुस्सा बुद्धि को जला देता है। एक बार क्रोध आया, भेदभाव मिट गया। फिर ना अपना बचा, ना पराया। श्रीकृष्ण की चेतावनी है– क्रोध से विवेक नष्ट होता है, और विवेक नष्ट होते ही विनाश तय है। थोड़ा रुक जाओ, गुस्सा उतर जाएगा।

आलस्य का चक्रव्यूह

कल करूंगा, यह सबसे बड़ा धोखा है। गीता के अनुसार, कर्म को टालना मौत को न्योता देना है। आलस्य हर सफल योजना को खत्म कर देता है। जो आज कर सकते हो, वही कर गुजरो। कल कभी आता ही नहीं है।

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अहंकार का पतन

थोड़ी सफलता या पैसा आते ही खुद को सर्वश्रेष्ठ मान लेना, पतन की पहली सीढ़ी है। अहंकारी को दुनिया हंसी में उड़ा देती है। कृष्ण सिखाते हैं- जितना झुकोगे, उतना बढ़ोगे। जो अहंकार करता है, वह अकेला गिरता है।

इन 3 सूत्रों से बदलें जीवन

इंद्रियों को तालीम दें: न अति सुख, न अति दुख। बीच का रास्ता ही सुरक्षित है।
फल की चिंता छोड़ो: बस अपना कर्तव्य करो। नतीजा मिले या न मिले, हार नहीं होगी।
धैर्य रखो: कठिन समय में घबराना मत। निरंतर चलने वाला ही मंजिल पाता है।

असली धन क्या है?

असली धन क्या है, इस मुड्ढे पर भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, मीठा व्यवहार, अच्छी सोच और सुंदर विचार ही असली पूंजी है। ऐसा व्यक्ति भले ही खाली हाथ हो, लेकिन वही अनमोल है। पैसा तो आता-जाता रहता है, लेकिन श्रेष्ठ व्यक्तित्व कभी बर्बाद नहीं होता है।

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First published on: Apr 21, 2026 05:10 PM

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