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Shivling Puja Rules: क्यों नहीं की जाती है शिवलिंग की पूरी परिक्रमा, क्यों रुष्ट हो जाते हैं भोलेनाथ; जानें वजह

Shivling Puja Rules: हिन्दू धर्म में शिवलिंग पूजा के खास नियम हैं, जिनमें पूरी परिक्रमा न करना भी एक प्रमुख परंपरा है. आइए जानते हैं, क्या इसके पीछे केवल एक परंपरा है या कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य है? जलहरी, ऊर्जा प्रवाह और शिव तत्व से जुड़ा यह नियम क्यों है इतना महत्वपूर्ण, जानें इसकी असली वजह?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 8, 2026 09:16
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Shivling Puja Rules: हिन्दू धर्म में भगवान शिव को सरल, करुणामय और शीघ्र प्रसन्न होने वाला देव माना गया है. उनकी पूजा का सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्वरूप शिवलिंग है. शिवलिंग की पूजा करते समय कई विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है. इन्हीं नियमों में से एक है शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करना. यह परंपरा केवल रीति नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक, ऊर्जा और पौराणिक अर्थ अपने भीतर समेटे हुए है. आइए जानते हैं कि शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती और इसके पीछे छिपा महत्व क्या है?

हिन्दू धर्म में शिवलिंग का महत्व

शिवलिंग को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यह सृष्टि की उत्पत्ति, संरक्षण और संहार तीनों का संकेत देता है. शिवलिंग निराकार शिव का साकार रूप है, जिसकी पूजा से मन, शरीर और आत्मा में संतुलन आता है. मान्यता है कि नियमित शिव पूजा से भय, रोग और नकारात्मकता दूर होती है.

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जलहरी का आध्यात्मिक अर्थ

शिवलिंग के साथ बनी जल निकासी को जलहरी, निर्मली या सोमसूत्र कहा जाता है. अभिषेक के बाद दूध, जल और अन्य द्रव्य इसी मार्ग से बाहर जाते हैं. यह मार्ग केवल निकासी नहीं, बल्कि शिव की शक्ति के प्रवाह का प्रतीक माना गया है. शास्त्रों में इसे अत्यंत पवित्र और पूजनीय बताया गया है.

क्यों वर्जित है पूरी परिक्रमा

मान्यता है कि जलहरी को लांघना या पार करना ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है. ऐसा करने से साधक के शरीर और मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसी कारण शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. भक्त बाईं ओर से परिक्रमा शुरू करते हैं और जलहरी के पास पहुंचकर वहीं रुक जाते हैं.

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चंद्र परिक्रमा का भाव

शिव अनादि और अनंत हैं. उनकी ऊर्जा को पूरी तरह नापा या पार नहीं किया जा सकता. इसी भाव के कारण आधी परिक्रमा की परंपरा बनी. इसे ‘चंद्र परिक्रमा’ कहा जाता है, जो यह दर्शाती है कि भक्त शिव की अनंत सत्ता के आगे स्वयं को समर्पित करता है.

पौराणिक कथा से जुड़ा संकेत

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि एक गंधर्व राजा ने अज्ञानवश जलहरी को लांघ दिया था. इसके परिणामस्वरूप उसकी दिव्य शक्ति क्षीण हो गई. इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि शिव पूजा में नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है.

शिवलिंग परिक्रमा के सही नियम

परिक्रमा हमेशा बाईं दिशा से शुरू करें.
जलहरी को कभी न लांघें.
आधी परिक्रमा कर उसी मार्ग से वापस लौटें.
परिक्रमा की संख्या विषम रखें.
परिक्रमा करते समय शांत मन से ॐ नमः शिवाय का जाप करें.

आपको बता दें कि शिवलिंग की पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि चेतना और ऊर्जा से जुड़ी साधना है. नियमों का सही पालन शिव कृपा को सहज बनाता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 08, 2026 09:16 AM

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