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Sheetala Ashtami: बसोड़ा पर्व के लिए बनाएं ये 7 भोग, मां शीतला होंगी प्रसन्न, देंगी सेहत और समृद्धि का वरदान

Sheetala Ashtami: शीतला सप्तमी और अष्टमी पर बसौड़ा की खास परंपरा निभाई जाती है, जिसमें माता शीतला को ठंडा भोजन अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इससे रोगों से रक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं, शीतला माता को कौन से खास भोग चढ़ाएं?

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Sheetala Ashtami: हिन्दू धर्म में शीतला सप्तमी और अष्टमी का पर्व स्वास्थ्य, स्वच्छता और आस्था से जुड़ा विशेष अवसर माना जाता है. इस दिन माता शीतला को ठंडा यानी पहले से बना भोजन अर्पित करने की परंपरा है, जिसे बसौड़ा कहा जाता है. मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों से रक्षा तथा समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसलिए सप्तमी की रात को विशेष पकवान बनाकर अष्टमी के दिन बिना चूल्हा जलाए पूजा की जाती है. आइए जानते हैं, माता शीतला को क्या भोग लगाएं, ताकि सेहत और समृद्धि का वरदान प्राप्त हो?

शीतला अष्टमी का महत्व

शीतला अष्टमी मुख्य रूप से उत्तर भारत और राजस्थान में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है. लोक मान्यता के अनुसार माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. खासकर चेचक जैसे रोगों से जुड़ी आस्था के कारण यह पर्व स्वास्थ्य और शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता है.

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इस दिन घरों में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है, बल्कि सप्तमी की रात को ही सारे पकवान तैयार कर लिए जाते हैं. अगले दिन इन्हें ठंडा होने के बाद माता को भोग लगाया जाता है. इसी परंपरा को बसौड़ा या बस्योरा कहा जाता है.

माता शीतला को लगाएं ये भोग

पूजा में कुछ खास व्यंजन जरूर शामिल किए जाते हैं. इन्हें माता का प्रिय भोग माना जाता है-

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मीठे चावल और लापसी: गुड़ या गन्ने के रस से बने मीठे चावल और गेहूं की लापसी प्रमुख प्रसाद माने जाते हैं. यह लगभग हर घर में बनाए जाते हैं.
ओलिया: दही और चावल से बनने वाला पारंपरिक व्यंजन. इसे हल्का मीठा या नमकीन दोनों तरह से बनाया जाता है.
बाजरे की रबड़ी: बाजरे के आटे और छाछ से तैयार यह पारंपरिक डिश शरीर को ठंडक देने वाली मानी जाती है.

यह भी पढ़ें: Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी में क्यों खाते हैं बासी भोजन? जानें इसके पीछे का प्राचीन विज्ञान और धार्मिक मान्यताएं

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केर सांगरी: राजस्थान का पारंपरिक सूखा व्यंजन ‘केर सांगरी’ मसालों और तेल में पकाई गई सब्जी है. बसौड़ा पर्व में इसे ठंडा भोजन के रूप में बनाया जाता है.
पूरी: गेहूं के आटे की पूड़ियां सप्तमी की रात को बनाकर रखी जाती हैं. अगले दिन यही भोग और भोजन दोनों में उपयोग होती हैं.
पुआ और गुलगुले: मीठे पुए त्योहार की मिठास बढ़ाते हैं. इन्हें मैदा या गेहूं के आटे और गुड़ से बनाया जाता है.
आलू की सूखी सब्जी: बिना प्याज और लहसुन के मसालों से बनी सूखी आलू की सब्जी भी भोग में शामिल की जाती है.

बनाए जाते हैं ये भी व्यंजन

इनके अलावा कई घरों में दही बड़े, बेसन की पकौड़ी, काले चने, दही, गुझिया, खाजा, चूरमा, लापसी, हलवा और भीगी हुई मूंग या चने की दाल भी बनाई जाती है. कुछ जगह बाजरे की रोटी और बेसन चक्की भी तैयार की जाती है. सभी पकवान सात्विक तरीके से बनाए जाते हैं.

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यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: 21 साल के बाद न करें ये 3 गलतियां, आचार्य चाणक्य से जानें परेशानी और गरीबी से बचने का सूत्र

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Mar 10, 2026 01:09 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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