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Pradyumn Ganesh Chaturthi: प्रद्युम्न चतुर्थी कल, 21 दूर्वा से करें गणेश पूजन, दूर होंगे रोग-तनाव, बढ़ेगा बैंक बैलेंस

Pradyumn Ganesh Chaturthi: ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी को प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. यह व्रत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है. आइए जानते हैं, इस दिन 21 दूर्वा से गणेश जी की पूजा कैसे करें?

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Pradyumn Ganesh Chaturthi: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ‘प्रद्युम्न गणेश चतुर्थी’ कहते हैं. पुराणों में, भगवान गणेश के 5 स्वरूपों में से एक को ‘प्रद्युम्न’ कहते हैं, जिसका अर्थ है- ‘सब पर विजय प्राप्त करने वाला.’ इस तिथि को भगवान गणेश के इसी रूप की उपासना की जाती है. यह व्रत बुद्धि, वाणी, सुख, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के लिए बेहद शुभ होता है, जो कल यानी 18 जून, 2026 को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत चारों पुरुषार्थ यानी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष दिलाने वाला माना गया है.

प्रद्युम्न चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी तिथि 17 जून की रात 9:38 बजे शुरू होकर 18 जून को शाम 6:58 बजे समाप्त होगी. प्रद्युम्न चतुर्थी पर मध्याह्न काल में पूजा करना सबसे उत्तम माना गया है. इस अवधि में भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस दिन मध्याह्न पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:46 बजे तक रहेगा.

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21 दूर्वा से करें गणेश पूजन

प्रद्युम्न चतुर्थी पर 21 हरी दूर्वा घास चढ़ाना अत्यंत फलदायी माना गया है. भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है. दूर्वा की 21 गांठें बनाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए चढ़ाएं. पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करें. इस तरह से गणेश जी की पूजा करने से 3 बड़े लाभ होते हैं: शारीरिक रोग और व्याधियों से मुक्ति मिलती है, मानसिक तनाव और चिंता दूर होती है और धन-धान्य के साथ बैंक बैलेंस में वृद्धि होती है.

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भगवान गणेश को क्यों प्रिय है दूर्वा?

हिन्दू धर्म की पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी ने के युद्ध के दौरान क्रोधित होकर अनलसुर नामक एक राक्षस को निगल लिया था, जो आग बरसाता था. इसके बाद उनके पेट में भयंकर जलन शुरू हो गई. कहते हैं, इस जलन को शांत करने के लिए 88 हजारर ऋषियों ने 21 दूर्वा के 21 गांठें बनाकर खिलाई थीं. इससे गणेश जी उदर का जलन शांत हो गया था. तभी से उन्हें दूर्वा अत्यंत प्रिय है. दूर्वा का शीतल प्रभाव गणेश जी के उग्र स्वरूप को शांत करता है. इससे अर्पित करने वालों पर बहुत प्रसन्न होते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी अंक ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Jun 17, 2026 09:32 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20+ वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है। वे स्वयं वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और एक सक्रिय ज्योतिष हैं। वे साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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