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Temple Bell Rules: मंदिर का घंटा किसी और के लिए बजाना शुभ या अशुभ, जानें घंटा बजाने का धार्मिक महत्व और नियम

Temple Bell Rules: हिन्दू धर्म में मंदिर का घंटा पवित्रता और श्रद्धा का प्रतीक माना गया है. इसे बजाने से जुड़े कई धार्मिक नियम बताए गए हैं. आइए जानते हैं, मंदिर का घंटा कब और किसके लिए बजाना चाहिए?

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Temple Bell Rules: हिन्दू धर्म में मंदिर का घंटा सिर्फ धातु की चीज नहीं है. प्राचीन काल से हिन्दू संस्कृति में मंदिर के घंटे को पवित्रता और श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता रहा है. प्रायः हर मंदिर में प्रवेश करते समय घंटा बजाना आज भी एक आम परंपरा है. बड़े-बुजुर्ग कहते हैं इसकी आवाज से नकारात्मकता दूर होती है और मन पूजा के लिए एकाग्र होता है. इसके साथ ही घंटे की गूंज वातावरण में सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद करती है. आइए जानते हैं, मंदिर का घंटा किसी और के लिए बजाना शुभ है अशुभ और इससे जुड़े धार्मिक नियम क्या हैं?

कब घंटा बजाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते समय या दर्शन से ठीक पहले घंटा बजाना उचित माना जाता है. आरती के दौरान भी घंटा बजाने की परंपरा है. वहीं, मंदिर से बाहर निकलते समय या दर्शन के बाद घंटा बजाने से बचने की बात कही जाती है. रात में या मंदिर के पट बंद होने के बाद भी घंटा न बजाने की मान्यता है.

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मंदिर में घंटा बजाने के नियम

घंटा बजाते समय कुछ सामान्य धार्मिक नियमों का ध्यान रखा जाता है:

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  • इसे लगातार या बहुत तेज आवाज में नहीं बजाना चाहिए.
  • मान्यता के अनुसार घंटा 1, 2 या 3 बार शांत और साफ ध्वनि में बजाना बेहतर है.
  • धार्मिक परंपराओं में दाहिने हाथ से घंटा बजाना शुभ माना जाता है.
  • घंटा बजाते समय श्रद्धा और मंदिर की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है.

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क्या किसी और के लिए घंटा बजा सकते हैं?

यह सवाल काफी लोगों के मन में रहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घंटा अपनी पूजा और अपनी उपस्थिति के भाव से बजाना चाहिए. इसे किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बजाने की परंपरा सामान्य रूप से नहीं मानी जाती. घंटा बजाना भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इसे मजाक या खेल-तमाशे के लिए बजाना भी उचित नहीं है.

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घंटे का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि घंटे की आवाज से मंदिर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है. इसकी गूंज को ‘ॐ’ की ध्वनि से भी जोड़ा जाता है. इससे मन को एकाग्र करने और पूजा पर ध्यान लगाने में मदद मिल सकती है. घंटे की ध्वनि को देवताओं के आह्वान और जागरण से जोड़ने की परंपरा भी रही है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Sep 01, 2026 11:35 PM

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श्यामनंदन कुमार पिछले 20+ वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है। वे स्वयं वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और एक सक्रिय ज्योतिष हैं। वे साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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