Nachiketa Taal: रहस्यमय है उत्तराखंड का नचिकेता ताल, यहां छुप-छुप के नहाती हैं परियां, जानें सच

Nachiketa Taal: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित नचिकेता ताल एक रहस्यमयी झील है. यहां यमराज ने नचिकेता को उपदेश दिया था. कहा जाता है कि यहां सुबह के 4 बजे परियां नहाने आती हैं. आइए जानते हैं, इस ताल का रहस्य क्या है?

Nachiketa-Taal

Nachiketa Taal: उत्तराखंड के उत्तरकाशी की ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसी झील है, जिसके बारे में जितना सुनो, उतना कम लगता है. यह है 2455 मीटर की ऊंचाई पर बसा नचिकेता ताल, जो दिन में शांत दिखता है. लेकिन बांज और बुरांश के घने जंगलों के बीच बसे इस ताल की रात और सुबह के समय इसकी कहानी पूरी तरह बदल जाती है. यहां सन्नाटा भी रहस्य से भरा लगता है, जिसमें कई कहानियां बुनी हैं.

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क्यों कहलाता है ‘मौत का ताल’?

इस ताल का नाम पुराणों में वर्णित प्रसिद्ध बालक नचिकेता से जुड़ा है. मान्यता है कि उन्होंने यहीं यमराज से मुलाकात की थी. कहा जाता है कि नचिकेता ने यमराज से जीवन और मृत्यु के गहरे रहस्य सीखे थे. यही वजह है कि लोग इसे ‘मौत का ताल’ भी कहते हैं. कई लोग मानते हैं कि यह जगह यमलोक का जाने रास्ता भी है.

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क्या है सुबह 4 बजे पायल बजने का रहस्य?

स्थानीय लोग एक अजीब बात बताते हैं. उनके अनुसार, रोज सुबह करीब 4 बजे यहां कुछ अलग ही होता है. गहरी खामोशी के बीच अचानक घंटियों की आवाज सुनाई देती है. कभी पायल की छन-छन भी सुनाई देती है. आसपास कोई नहीं होता, फिर भी आवाज साफ सुनाई देती है.

क्या सच में यहां नहाती हैं परियां?

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस समय परियां, जिन्हें यहां ‘आंछरी’ कहा जाता है, इस ताल में स्नान करने आती हैं. लोग बताते हैं कि कई बार पानी में हलचल दिखती है, जैसे कोई मौजूद हो. कुछ लोग इसे आंखों का भ्रम मानते हैं, लेकिन जो सुनते या देखते हैं, उनके लिए यह अनुभव बेहद अलग होता है.

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यम गुफा – एक रहस्यमयी रास्ता

ताल से थोड़ा आगे एक गुफा है, जिसे ‘यम गुफा’ कहा जाता है. मान्यता है कि नचिकेता इसी रास्ते यमलोक गए थे. गुफा अंदर से अंधेरी और डरावनी लगती है. लोग यहां जाने से कतराते हैं, लेकिन इसे देखने की जिज्ञासा हर किसी के मन में होती है.

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नाग देवता का पहरा

ताल के किनारे एक पुराना नाग मंदिर है. स्थानीय लोग मानते हैं कि नाग देवता इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. यहां आने वाले लोग पहले मंदिर में माथा टेकते हैं, फिर ताल के पास जाते हैं.

रहस्य और प्रकृति का साथ

यहां तक पहुंचने के लिए 3-4 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है. रास्ता जंगलों से होकर जाता है, जहां हर कदम पर ठंडी हवा और अजीब सी खामोशी महसूस होती है. ऊपर पहुंचकर जब साफ पानी में जंगलों की परछाई दिखती है, तो लगता है जैसे कोई दूसरी दुनिया हो.

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सच बनाम रहस्य क्या है?

कुछ लोग इन घटनाओं को प्राकृतिक मानते हैं. उनका कहना है कि हवा, पेड़ और ऊंचाई की वजह से आवाजें अलग सुनाई देती हैं. लेकिन जो लोग यहां जा चुके हैं, वे मानते हैं कि इस जगह में कुछ तो खास जरूर है, जिसे शब्दों में समझाना आसान नहीं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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