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Shambhu Stuti: श्रीराम ने क्यों की थी शंभू स्तुति की रचना? जानें इसके नियम, लिरिक्स और लाभ

Shambhu Stuti Lyrics: प्राचीन काल में श्रीराम ने खुद शंभू स्तुति की रचना की थी, जिसका आज यानी कलयुग में पाठ करना बहुत शुभ है. मान्यता है कि शंभू स्तुति का पाठ करने से मन शांत होता है और संकटों से लड़ने की शक्ति मिलती है. चलिए जानते हैं कि श्रीराम ने क्यों शंभू स्तुति की रचना की थी. साथ ही आप इसके महत्व, नियम, लिरिक्स और लाभ आदि के बारे में जान पाएंगे.

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Shambhu Stuti Lyrics, Benefits & Astro Niyam: शंभू स्तुति, देवों के देव महादेव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि राम जी जब लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए जा रहे थे तो उन्हें समुद्र पार करना था, जिससे पहले उन्होंने रामेश्वरम में एक शिवलिंग की स्थापना की थी. साथ ही शिवलिंग की पूजा की और अपनी विजय व जगत के कल्याण के लिए पहली बार शंभू स्तुति का पाठ किया. इसी के बाद से देशभर में शंभू स्तुति का पाठ करने की परंपरा शुरू हो गई.

मान्यता है कि नियमित रूप से शंभू स्तुति का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव दूर होता है. साथ ही व्यक्ति को परेशानियों से लड़ने की शक्ति मिलती है और वो खुश-संतुष्ट रहता है. आइए अब जानें शंभू स्तुति के लिरिक्स, नियम और अन्य जरूरी बातों के बारे में.

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शंभू स्तुति के लिरिक्स

नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं, नमामि सर्वज्ञमपारभावम्।
नमामि रुद्रं प्रभुमक्षयं तं, नमामि शर्वं शिरसा नमामि॥१॥
नमामि देवं परमव्ययंतं, उमापतिं लोकगुरुं नमामि।
नमामि दारिद्रविदारणं तं, नमामि रोगापहरं नमामि॥२॥
नमामि कल्याणमचिन्त्यरूपं, नमामि विश्वोद्ध्वबीजरूपम्।
नमामि विश्वस्थितिकारणं तं, नमामि संहारकरं नमामि॥३॥
नमामि गौरीप्रियमव्ययं तं, नमामि नित्यंक्षरमक्षरं तम्।
नमामि चिद्रूपममेयभावं, त्रिलोचनं तं शिरसा नमामि॥४॥
नमामि कारुण्यकरं भवस्या, भयंकरं वापि सदा नमामि।
नमामि दातारमभीप्सितानां, नमामि सोमेशमुमेशमादौ॥५॥
नमामि वेदत्रयलोचनं तं, नमामि मूर्तित्रयवर्जितं तम्।
नमामि पुण्यं सदसद्व्यातीतं, नमामि तं पापहरं नमामि॥६॥
नमामि विश्वस्य हिते रतं तं, नमामि रूपापि बहुनि धत्ते।
यो विश्वगोप्ता सदसत्प्रणेता, नमामि तं विश्वपतिं नमामि॥७॥
यज्ञेश्वरं सम्प्रति हव्यकव्यं, तथागतिं लोकसदाशिवो यः।
आराधितो यश्च ददाति सर्वं, नमामि दानप्रियमिष्टदेवम्॥८॥
नमामि सोमेश्वरंस्वतन्त्रं, उमापतिं तं विजयं नमामि।
नमामि विघ्नेश्वरनन्दिनाथं, पुत्रप्रियं तं शिरसा नमामि॥९॥
नमामि देवं भवदुःखशोक, विनाशनं चन्द्रधरं नमामि।
नमामि गंगाधरमीशमीड्यं, उमाधवं देववरं नमामि॥१०॥
नमाम्यजादीशपुरन्दरादि, सुरासुरैरर्चितपादपद्मम्।
नमामि देवीमुखवादनानां, ईक्षार्थमक्षित्रितयं य ऐच्छत्॥११॥
पंचामृतैर्गन्धसुधूपदीपैः, विचित्रपुष्पैर्विविधैश्च मन्त्रैः।
अन्नप्रकारैः सकलोपचारैः, सम्पूजितं सोममहं नमामि॥१२॥

॥ इति श्रीब्रह्ममहापुराणे शम्भुस्तुतिः सम्पूर्णा ॥

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Frequently Asked Questions

वैसे तो किसी भी दिन शंभू स्तुति का पाठ किया जा सकता है, लेकिन सोमवार के दिन इसका पाठ करना ज्यादा शुभ होता है. इसके अलावा शिव जी को समर्पित प्रदोष व्रत, शिवरात्रि, महाशिवरात्रि व अन्य व्रत-त्योहार पर भी आप इसका पाठ कर सकते हैं.
ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोष काल में शंभू स्तुति का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है.
शंभू स्तुति का पाठ करने से पहले राम जी का स्मरण करें. यदि पाठ करना शुरू कर दिया है तो उसे बीच में न छोड़ें. साथ ही गलत व जल्दबाजी में पाठ न करें.
First published on: May 31, 2026 12:42 PM

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Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. पिछले 3 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रही हैं. न्यूज 24 से जुड़ने से पहले निधि जैन दिल्ली प्रेस संस्थान में कार्यरत थीं. निधि ने Guru Jambheshwar University, Hisar Haryana से BJMC (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है.

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