Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि आज से शुरू, जानें क्यों होती है दस महाविद्या की साधना

Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि आज से शुरू हो रही है, जिसमें कलश स्थापना के साथ मां की दस महाविद्याओं की गुप्त साधना की जाती है. यह नवरात्रि दिखावे नहीं, बल्कि मंत्र-जप और आत्मिक शुद्धि के लिए मानी जाती है. जानिए आखिर कौन हैं दस महाविद्याएं और क्यों है इनकी साधना इतनी विशेष?

magh-gupt-navratri

फोटो: Meta AI

विज्ञापन

Magh Gupt Navratri 2026: आज सोमवार 19 जनवरी, 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. आज से माघ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है. माघ गुप्त नवरात्रि में साधक साधना, मंत्र-जप और आत्मिक शुद्धि के उद्देश्य से पूजा-अर्चना करते हैं. यह गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अलग मानी जाती है, क्योंकि इसमें दिखावे की जगह गुप्त साधना, मंत्र-जप, ध्यान और आत्मिक उन्नति पर ध्यान दिया जाता है.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आज कलश स्थापना के साथ माता रानी की दस महाविद्याओं की पूजा की जाएगी. कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 01 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अभिजित मुहूर्त में दोपहर 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट के बीच भी कलश स्थापना की जा सकती है. आइए जानते हैं, दस महाविद्या क्या हैं और गुप्त नवरात्रि में क्यों होती है इनकी साधना?

विज्ञापन

बन रहे हैं ये शुभ योग

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के शुभ अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. यह खास योग सुबह 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा.

इस शुभ योग में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से हर काम में सफलता मिलने के योग बनते हैं. माना जाता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में की गई साधना से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है, सौभाग्य का साथ मिलता है और चल रही परेशानियों से राहत मिलती है. इसलिए इस समय में मां दुर्गा की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है.

विज्ञापन

दस महाविद्या की साधना

साल 2026 की माघ मास की गुप्त नवरात्रि का समापन 27 जनवरी, 2026 होगा. इस दौरान देवी मां के दस महाविद्या स्वरूपों की विशेष पूजा की जाएगी. इन नौ नहीं बल्कि दस दिनों में हर दिन मां का अलग-अलग स्वरूप आराधना का केंद्र होता है.

पहले दिन मां काली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी, चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवें दिन मां छिन्नमस्तिका, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी, नौवें दिन मां मातंगी और दसवें दिन मां कमला की पूजा की जाती है.

विज्ञापन

इन पावन दिनों में उपवास रखना, संयमित जीवन जीना और धार्मिक नियमों का पालन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. ऐसा करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है, साधना में सफलता मिलती है और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

इसलिए की जाती है दस महाविद्या की पूजा

दस महाविद्याएं आदिशक्ति मां पार्वती के ही दस अलग-अलग रूप मानी जाती हैं. ये सभी स्वरूप दिशाओं, समय और अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक हैं. हर महाविद्या का अपना विशेष महत्व और प्रभाव होता है.

विज्ञापन

दस महाविद्याओं की साधना जीवन के हर क्षेत्र में लाभ देने वाली मानी जाती है. इससे भौतिक सुखों की प्राप्ति, आध्यात्मिक प्रगति, ज्ञान और आत्मबल बढ़ता है. साथ ही भय, शत्रु बाधा, धन की समस्या और ग्रह दोष जैसी परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है.

यह साधना जीवन के चारों उद्देश्य—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—के बीच संतुलन बनाकर सफलता का मार्ग खोलती है. माना जाता है कि इन महाविद्याओं की कृपा से साधक को आंतरिक शक्ति, मानसिक शांति और परम सुख की अनुभूति होती है, क्योंकि ये सभी स्वरूप आदिशक्ति के ही विविध रूप हैं, जो हर परिस्थिति में साधक को शक्ति और संरक्षण प्रदान करते हैं.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ