Masik Kalashtami 2026 Today: कालाष्टमी का व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखा जाता है. आज आषाढ़ महीने का कालाष्टमी व्रत है. आज आषाढञ कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि है इसका समापन दोपहर को 1 बजकर 24 मिनट पर हो जाएगा. इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी. कालाष्टमी पर रात के समय सूर्यास्त के बाद पूजा का महत्व होता है. ऐसे में आज ही कालाष्टमी व्रत है. आज कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में जानते हैं.
कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:08 से 04:49
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:29 से 05:29
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:58 से 12:54
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:45 से 03:40
सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:23 से रात 08:23
निशिता मुहूर्त- रात में 12:06 से 12:46, 8 जुलाई
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कालभैरव भगवान पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा का महत्व होता है. आप कालाष्टमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. कालभैरव मंदिर जाकर कालभैरव भगवान की पूजा करें. कालभैरव भगवान की पूजा निशिता काल या सूर्यास्त के बाद की जाती है. शाम के समय घर के पूजा स्थान की सफाई करें.
घर के मंदिर में चौकी लगाकर भगवान कालभैरव की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद पुष्प, चंदन, धूप, दीप अर्पित करें. प्रतिमा के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. भगवान कालभैरव को इमरती का भोग जरूर लगाएं. आप कालभैरव भगवान की कृपा पाने के लिए कुत्ते को दूध, दही या मिठाई खिलाएं. कुत्ते को कालभैरव का वाहन माना जाता है.
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कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र और प्रचंड रूप 'कालभैरव' को समर्पित माना जाता है. कालाष्टमी पर व्रत और पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान कालभैरव की उत्पत्ति मानी जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Masik Kalashtami 2026 Today: कालाष्टमी का व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखा जाता है. आज आषाढ़ महीने का कालाष्टमी व्रत है. आज आषाढञ कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि है इसका समापन दोपहर को 1 बजकर 24 मिनट पर हो जाएगा. इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी. कालाष्टमी पर रात के समय सूर्यास्त के बाद पूजा का महत्व होता है. ऐसे में आज ही कालाष्टमी व्रत है. आज कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में जानते हैं.
कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:08 से 04:49
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:29 से 05:29
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:58 से 12:54
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:45 से 03:40
सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:23 से रात 08:23
निशिता मुहूर्त- रात में 12:06 से 12:46, 8 जुलाई
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कालभैरव भगवान पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा का महत्व होता है. आप कालाष्टमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. कालभैरव मंदिर जाकर कालभैरव भगवान की पूजा करें. कालभैरव भगवान की पूजा निशिता काल या सूर्यास्त के बाद की जाती है. शाम के समय घर के पूजा स्थान की सफाई करें.
घर के मंदिर में चौकी लगाकर भगवान कालभैरव की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद पुष्प, चंदन, धूप, दीप अर्पित करें. प्रतिमा के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. भगवान कालभैरव को इमरती का भोग जरूर लगाएं. आप कालभैरव भगवान की कृपा पाने के लिए कुत्ते को दूध, दही या मिठाई खिलाएं. कुत्ते को कालभैरव का वाहन माना जाता है.
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कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र और प्रचंड रूप ‘कालभैरव’ को समर्पित माना जाता है. कालाष्टमी पर व्रत और पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान कालभैरव की उत्पत्ति मानी जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.