Neem Karoli Baba: आज नीम करोली बाबा के भक्त और साधक पूरी दुनिया में हैं. उनके मुख्य आश्रम कैंची धाम के नेतृत्व में संसार के कई देशों में संस्थाएं उनके संदेश को फैला रही हैं. यही कारण है कि दुनिया भर की दिग्गज हस्तियां उनसे आज भी लाभान्वित हो रही हैं, जैसा कि एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स को मिला. आइए इस आर्टिकल में यह जानते हैं कि महाराज जी का नाम ‘नीम करोली’ कैसे पड़ा? और क्या यह प्रसंग सही है कि उनकी दिव्य शक्तियों ने कड़वे नीम को भी मीठा बना दिया था?
‘लक्ष्मण दास’ कैसे बने ‘नीम करोली बाबा’
नीम करोली बाबा का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा है, जिनका जन्म यूपी के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था. कहते हैं कि उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया था. इसके बाद उनके कई नाम पड़े- लक्ष्मण बाबा, तलैया वाले बाबा या गुजरात में बावले बाबा, पागल बाबा और फकीर बाबा. लोग उन्हें प्रेम और सम्मान से महाराज जी भी कहते थे. लेकिन कहा जाता है कि उनका सबसे प्रसिद्ध नाम ‘नीम करोली बाबा’ यूपी के ही फर्रुखाबाद के एक गांव ‘नीब किरोरी’ से जुड़ा है?
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ये है नाम पड़ने का असली कारण
यह बेहद प्रसिद्ध कथा है कि सन 1930 में बाबा बिना टिकट एक ट्रेन के फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे थे. नीब किरोरी स्टेशन के पास टीटीई ने बाबा के टिकट नहीं दिखाने पर उन्हें ट्रेन से उतार दिया. कहते हैं, ट्रेन से उतरकर बाबा ने वहीं पास में ही एक नीम के पेड़ के नीचे चिमटा गाड़ दिया और बैठ गए.
इसके बाद की जो घटना है, वो सदियों पहले न हुआ था और न सदियों साल बाद होगा. कहते हैं कि इसे बाद ट्रेन वहां से इंच भी आगे नहीं बढ़ पाई, जब तक कि एक रेलवे कर्मचारी के कहने पर टीटीई ने बाबा से माफी नहीं मांगी और उन्हें फिर से आदर सहित ट्रेन में नहीं बैठाया. इस घटना के बाद से महाराज जी ‘नीम करोली बाबा’ के नाम से मशहूर हो गए.
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क्या बाबा ने वाकई नीम को मीठा कर दिया?
नीम किरोरी गांव में प्रवास के दौरान बाबा एक भूमिगत गुफा में ध्यान लगाते थे. उन्ही दिनों नीम के पत्तों को मीठा करने का चमत्कार हुआ, जो लोग आज भी याद करते हैं. कहते हैं, गर्मी के मौसम में कुछ साधु उनसे मिलने आए थे. गांव में खाने पीने की व्यवस्था नहीं हो पाई थी. भूखे-प्यासे मेहमानों की प्यास और भूख की व्याकुलता को देखकर बाबा ने कहा कि पास के नीम के पेड़ से कुछ पत्तियां तोड़कर खा लो. लोग थोड़ा झिझके. आखिर नीम की पत्तियां कड़वी जो होती हैं. लेकिन बाबा की बात मानकर एक साधु ने जैसे ही नीम की पत्ती मुंह में रखी, वह हैरान रह गया. पत्ती कड़वी नहीं, बल्कि मीठी थी.
कहा जाता है कि बाबा ने अपनी योग शक्ति से नीम के पेड़ के एक हिस्से की कड़वाहट को मिठास में बदल दिया था. ऐसा उन्होंने अपने भूखे मेहमानों की मदद के लिए किया था. मॉडर्न साइंस में इस तरह की जैव-वैज्ञानिक घटना को आज ‘म्यूटेशन’ कहा जाता है. लेकिन साधक और भक्त यह मानते हैं कि यह केवल और केवल नीम करोली बाबा के दिव्य गुणों का प्रमाण है.
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