Dusra Mangla Gauri Vrat 2026: सावन महीने में मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह दिन मां पार्वती और शिव जी की पूजा के लिए समर्पित होता है. मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, अखंड सौभाग्य और जीवन सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत किया जाता है. सावन महीने का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026, दिन मंगलवार को है.
मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त (Mangla Gauri Vrat Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त – 04:22 ए एम से 05:05 ए एम
प्रातः सन्ध्या – 04:44 ए एम से 05:48 ए एम
अभिजित मुहूर्त – 12:00 पी एम से 12:53 पी एम
विजय मुहूर्त – 02:39 पी एम से 03:32 पी एम
गोधूलि मुहूर्त – 07:04 पी एम से 07:26 पी एम
सायाह्न सन्ध्या – 07:04 पी एम से 08:09 पी एम
अमृत काल – 07:59 ए एम से 09:25 ए एम
निशिता मुहूर्त – 12:05 ए एम से 12:48 ए एम, 12 अगस्त
मंगला गौरी व्रत के अवसर पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. मंगला गौरी व्रत की पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का समय् अच्छा होता है. आप उपरोक्त मुहूर्त के अनुसार, व्रत की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि (Mangla Gauri Vrat Puja Vidhi)
मंगला गौरी व्रत पर मां पार्वती और शिव जी की पूजा का महत्व होता है. इस व्रत को करने के दिन नहाकर तैयार हो जाएं. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर लकड़ी की चौकी लगाएं. भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करे. भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. मां पार्वती को हल्दी, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र आदि सुहाग की सामग्री अर्पित करें. मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करें. मां पार्वती की आरती कर पूजा संपन्न करें.
मंगला गौरी व्रत के नियम (Mangla Gauri Vrat Rules)
मंगला गौरी व्रत के दिन अन्न नहीं खाना चाहिए. व्रत कर रही महिलाओं को सिर्फ फलाहार या दिन में एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए. भोजन में सेंधा नमक का इस्तेमाल करें. मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें. ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. व्रत के दौरान दिन के समय सोने से परहेज करें. किसी से विवाद करने और झगड़ा करने से बचें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.