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Kaalchakra: कुंडली के किस भाव में मौजूद शनि देता है शुभ-अशुभ फल? जानें पंडित सुरेश पांडेय से

हर एक व्यक्ति के जीवन पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। कई बार शनि देव शुभ फल भी प्रदान करते हैं। चलिए पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं कुंडली के किस भाव में शनि के विराजमान होने से व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल मिलता है।

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ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का खास महत्व है, जो न्याय, कर्मफल, उम्र और संघर्ष के दाता हैं। शनि का संबंध दुख, बीमारी और मृत्यु से भी है। जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति अच्छी नहीं होती है या शनि दोष होता है, उन्हें शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है। व्यक्ति किसी न किसी कारण परेशान रहता है और उसके घर में आए-दिन क्लेश होते हैं। हालांकि जब शनि कुंडली में शुभ स्थिति में शुभ भाव में विराजमान होते हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर देखने को मिलता है।

आज के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको बताने जा रहे हैं कि कुंडली के किस भाव में शनि के विराजमान होने से व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल मिलता है। साथ ही उससे होने वाले लाभ के बारे में भी पता चलेगा।

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कब शनि देता है अशुभ फल?

  • लग्न भाग में शनि के होने से व्यक्ति आलसी और स्वार्थी बनता है।
  • कुंडली के पहले भाव में शनि, तीसरे, 7वें और 10वें भाव को देखता है या शनि की दृष्टि तीसरे भाव पर हो तो व्यक्ति के साहस में कमी आती है। छोटे भाई-बहनों से मतभेद होते हैं। जोखिम उठाने में व्यक्ति को डर महसूस होता है।
  • लग्न में बैठे शनि सातवें भाव को देखते हैं तो ऐसा व्यक्ति झूठ बोलने की आदत के कारण परेशान रहता है। लेकिन उनका वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति को साझेदारी में काम करने से लाभ मिलता है।
  • दूसरे भाव में शनि चौथे, 8वें या 11वें भाव को देखता है या शनि की दृष्टि चौथे भाव पर हो तो व्यक्ति को सुख-सुविधाओं की कमी हो सकती है। इसके अलावा माता से जुड़े संबंधों से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • दूसरे भाव में बैठकर शनि 8वें भाव को देखते हैं तो मानसिक परेशानियों और लंबी बीमारियों की आशंका बनी रहती है लेकिन व्यक्ति को रिसर्च और गूढ़ विषयों (जटिल) में सफलता मिल सकती है।
  • दूसरे भाव में बैठकर शनि 11वें भाव को प्रभावित करते हैं तो खर्च बढ़ते हैं और बचत में असंतुलन रहता है।

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कब शनि देता है शुभ फल?

  • लग्न में बैठा शनि मजबूत स्थिति में हो तो व्यक्ति अनुशासित प्रिय और मेहनती होता है।
  • लग्न में बैठा शनि जब 10वें भाव को देखता है तो व्यक्ति कड़ी मेहनत करता है। यदि व्यक्ति ईमानदारी से काम करता है तो उसे सफलता जरूर मिलती है।
  • कुंडली के दूसरे भाव में शनि हो तो व्यक्ति की वाणी और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। वाणी में गंभीरता आती है और पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग बनते हैं।

यदि आप जानना चाहते हैं कि और किन-किन परिस्थितियों में शनि शुभ और अशुभ फल देते हैं तो इसके लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देखें।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: May 23, 2025 10:48 AM

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