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हाथों पर मेहंदी लगाना भारतीय संस्कृति में एक प्राचीन परंपरा है, जो न केवल सौंदर्य और श्रृंगार का प्रतीक है, बल्कि शास्त्रों और ग्रंथों के अनुसार इसके कई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी हैं। मेहंदी का उपयोग विशेष रूप से त्योहारों, विवाह और धार्मिक अवसरों पर किया जाता है। वहीं, शास्त्रों में मेहंदी को शुभता, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। आयुर्वेद और ज्योतिष शास्त्र में भी मेहंदी का विशेष महत्व है। इसे ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।

सौभाग्य और समृद्धि का है प्रतीक

हिंदू धर्म में मेहंदी को माता लक्ष्मी और वैभव का प्रतीक माना जाता है। स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मेहंदी को शुभ कार्यों से जोड़ा गया है। विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर दुल्हन के हाथों पर मेहंदी लगाने की परंपरा इसलिए प्रचलित है, क्योंकि यह सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में प्रेम का प्रतीक है। विष्णु पुराण के अनुसार, मेहंदी की शीतलता और सुगंध मन को शांत करती है, जो व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। यह सौभाग्य और धन-धान्य की प्राप्ति में सहायक मानी जाती है।

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ग्रहों का अशुभ प्रभाव होता है कम

ज्योतिष शास्त्र में मेहंदी को चंद्रमा और शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। चंद्रमा मन की शांति और शुक्र सौंदर्य, प्रेम और वैभव के कारक हैं। मेहंदी लगाने से इन ग्रहों का प्रभाव संतुलित होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आती है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विशेष नक्षत्रों या शुभ मुहूर्त में मेहंदी लगाने से नकारात्मक ग्रह दोष कम होते हैं।

दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा

मेहंदी का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। यह माना जाता है कि मेहंदी लगाने से व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। इसके साथ ही कुछ ग्रंथों में मेहंदी को तंत्र-मंत्र साधनाओं से जोड़ा गया है, जहां इसे सुरक्षा कवच के रूप में उपयोग किया जाता है। गरुड़ पुराण में मेहंदी को पवित्रता और शुद्धिकरण का प्रतीक माना गया है। इसे लगाने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है।

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होते हैं स्वास्थ्य लाभ

आयुर्वेद के अनुसार, मेहंदी में औषधीय गुण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। मेहंदी की तासीर ठंडी होती है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को शीतलता प्रदान करती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता में मेहंदी को त्वचा के लिए लाभकारी बताया गया है। यह त्वचा को ठंडक देती है और गर्मी से होने वाली जलन या त्वचा रोगों को कम करती है।

मेहंदी की सुगंध और इसे लगाने की प्रक्रिया मन को शांत करती है। आयुर्वेद के अनुसार, मेहंदी लगाने से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है, क्योंकि यह मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करती है। यह ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाने में भी सहायक है। मेहंदी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। सुश्रुत संहिता में मेहंदी को त्वचा रोगों, जैसे दाद, खुजली और फंगल इंफेक्शन के उपचार में उपयोगी बताया गया है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Jul 29, 2025 05:41 PM

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