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श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi: गोस्वामी तुलसीदास जी रचित मूल ‘हनुमान चालीसा’

Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi: हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक पवित्र और चमत्कारी स्तोत्र है, जिसमें 40 चौपाइयां हैं। इसके नियमित पाठ से मन को शांति, भय से मुक्ति और जीवन में शक्ति व आत्मविश्वास मिलता है। पढिए, तुलसी रचित हनुमान चालीसा का मूल पाठ।

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Edited By : Shyamnandan Updated: May 5, 2026 18:53
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Shree Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi: हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया है, जो बेहद लोकप्रिय और चमत्कारी स्तोत्र है। इसमें कुल 40 चौपाइयां हैं, इसलिए इसे ‘चालीसा’ कहा जाता है। इसे 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रचा था। यह रचना भक्ति, समर्पण और शक्ति का अद्भुत संगम है, जो हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और रामभक्ति का विस्तार से वर्णन करती है।

हिन्दू धर्म मे हनुमान चालीसा बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण है। मान्यता के अनुसार, इसे स्वयं भगवान शिव का अवतार माने जाने वाले हनुमान जी को प्रसन्न करने का सरलतम साधन माना गया है। इसके नियमित पाठ से मन को अद्भुत शांति मिलती है, हर तरह के भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाकर जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा को दूर करने की शक्ति प्रदान करती है। संकट के समय इसका पाठ सुरक्षा कवच का काम करता है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करता है। आइए जानते हैं, गोस्वामी तुलसीदास जी रचित मूल ‘हनुमान चालीसा’पाठ:

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श्री हनुमान चालीसा | Shri Hanuman Chalisa in Hindi

दोहा:

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

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चौपाई:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै॥

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥

दोहा:

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

॥ जय श्रीराम ॥

Frequently Asked Questions

हनुमान चालीसा का पाठ सुबह जल्दी, लगभग 4 से 6 बजे के बीच करना सबसे शुभ माना जाता है। शाम को 8 बजे के बाद घी का दीपक जलाकर पढ़ें तो इसका फल और भी अच्छा माना जाता है। लेकिन यह भी नोट कर लें कि इस चालीसा को कभी भी किसी भी समय पढ़ा और सुना जा सकता है। जब भी मन घबराए या विचलित हो जो इसे जरूर पढ़ें।
हनुमान चालीसा का पाठ नियम से करना हो तो इसे कम से कम 40 दिनों तक बिना रुके करना चाहिए। इसकी शुरुआत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के मंगलवार से करें, क्योंकि इसे सबसे शुभ समय माना गया है।
हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ करने से इंसान कई तरह की परेशानियों और बंधनों से मुक्त हो सकता है। आप चाहें तो इसे 1, 3 या 11 बार भी पढ़ सकते हैं, जबकि 101 बार पाठ करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है। यह उत्तर स्वयं तुलसीदासजी ने चालीसा में दिया है।
हनुमान चालीसा पढ़ने पर किसी तरह की रोक नहीं है, इसे हर कोई कर सकता है। चाहे स्त्री हो या पुरुष, बच्चे हों या बुजुर्ग, हर व्यक्ति, यहां तक कि किन्नर भी, इसे पढ़कर लाभ ले सकता है।
मासिक धर्म के समय परंपराओं के अनुसार मंदिर की मूर्ति या पूजा सामग्री को छूना उचित नहीं माना जाता है। लेकिन मन ही मन भगवान का स्मरण करना या हनुमान चालीसा पढ़ना पूरी तरह से स्वीकार्य है यानी महिलाएं इसे पीरियड के दरम्यान पढ़ सकती हैं।
गोरखपुर की गीता प्रेस संस्था के अनुसार, हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास की रचना है।
First published on: May 05, 2026 06:52 PM

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