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Gupt Navratri 2026 Second Day: आज गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां तारा देवी की पूजा, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Gupt Navratri 2026 Second Day: आज 16 जुलाई दिन गुरुवार को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है. गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन मां तारा देवी की पूजा के लिए समर्पित होता है. आइये आज के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रों के बारे में जानते हैं.

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Gupt Navratri 2026 Maa Tara Devi Puja: गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा देवी की पूजा-अर्चना करने का विधान है. गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है. देवी तारा 10 महाविद्याओं में से दूसरी देवी हैं. भक्तों को बुद्धि, ज्ञान और आत्मविश्वास की प्राप्ति के लिए तारा देवी की पूजा करनी चाहिए. तारा देवी को तारिणी यानी भवसागर से तारने वाली यानी पार लगाने वाली माना जाता है. आज दूसरी नवरात्रि पर मां तारा देवी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं.

गुप्त नवरात्रि दूसरा दिन शुभ मुहूर्त (Gupt Navratri Shubha Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त- 04:12 ए एम से 04:53 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
सायाह्न सन्ध्या- 07:21 पी एम से 08:22 पी एम
अमृत काल- 06:23 पी एम से 07:52 पी एम
निशिता मुहूर्त- 12:07 ए एम से 12:48 ए एम, 17 जुलाई

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मां तारा देवी पूजा विधि (Maa Tara Devi Puja Vidhi)

नवरात्रि के दिन भक्त सुबह उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर मां तारा देवी की प्रतिमा स्थापित करें. आप प्रतिमा के समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएं. तारा देवी को लाल या नीले रंग के फूल चढ़ाएं. तारा मां को अक्षत, कुमकुम, कपूर आदि अर्पित करें. शांत मन से पूजा करें और मंत्रों का जाप करें. देवी मां को फलों और मिठाई का भोग लगाएं और आरती कर पूजा संपन्न करें. मां तारा देवी की पूजा सूर्यास्त के बाद या निशिता मुहूर्त में कर सकते हैं.

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मां तारा देवी मंत्र (Maa Tara Devi Mantra)

मां तारा देवी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को पूजा के दौरान इन दो ‘ॐ त्रीं नमः’ और ‘ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्’ मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए. इन मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है. आप पूजा के दौरान धूप-दीप जलाने के बाद प्रतिमा के समक्ष बैठकर इन मंत्रों का जाप करें. इन मंत्रों का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है.

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तारा देवी की आरती (Maa Tara Devi Ki Aarti)

जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।
चंद्रमा कोहनी भ्राजत,
हंस रूप बन माँ तुम आई।
कनकवाले केशों में,
धूप-दीप फिर सजे।
कंबल नीला, वस्त्र सुंदर,
चरणों में अंगूर सजे।
चन्दन बासम बिलोचन पर,
बेल पत्रानि मला धरू।
भक्तों के काज राखो,
शंकर मन्दिर विशेष आयूं।
जय तारा तुम जग विख्यात,
ब्रह्माणी रूप सुन्दर भात।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jul 16, 2026 08:33 AM

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