Temples of India: भारत को मदिरों और आश्रमों का देश कहा जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से लेकर पश्चिम विविध प्रकार के देवता और उनके अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी लाखों रहस्यमय कथा-कहानियां हैं, जहां के रीति-रिवाज और नियम भी अनूठे हैं। ऐसा ही एक मंदिर लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता की नगरी अल्मोड़ा की घाटियों में है।
चितई गोलू देवता मंदिर
हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का नाम है चितई गोलू देवता मंदिर, जिसमें स्थानीय लोगों की जबरदस्त आस्था और विश्वास है। कुमाऊं क्षेत्र में चितई गोलू देवता को ‘न्याय का देवता और परम न्यायाधीश’ के रूप में इनकी पूजा की जाती हैं। कहते हैं, जब लोग हर जगह निराश हो जाते हैं, कोर्ट-कचहरी आदि से सब कुछ हार जाते हैं, तब लोग यहां आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।
कौन थे चितई गोलू देवता?
अल्मोड़ा के चंपावत (धूमाकोट) के इतिहासे के अनुसार, चितई गोलू देवता कत्यूरी राजवंश के राजकुमार थे, जो महादेव शिव के ‘गौर भैरव’ रूप के अवतार थे। उन्होंने न्यायप्रिय कत्यूरी राजा झाल राय की आठवीं रानी कालिंका के गर्भ से जन्म लिया था। लेकिन सात अन्य रानियों ने उसे षडयंत्र कर एक सन्दूक में बंद कर काली नदी की धारा में बहा दिया और राजा से कहा कि रानी ने पत्थर के सिलबट्टे को जन्म दिया है।
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मछुआरे ने किया पालन-पोषण
नदी में बहता वह सन्दूक भाना नाम के मछुआरे को मिला, जिसने बालक का पालन-पोषण किया और नाम रखा गोलू। यह बालक विलक्षण था। बड़े होने पर एक दिन गोलू एक लकड़ी का घोड़ा लेकर राजा के घाट पर उसे पानी पिलाने पहुंचा। रानियों ने उपहास किया लकड़ी का घोड़ा पानी कैसे पी सकता है। तब गोलू ने पलट कर जवाब दिया, ‘जब एक रानी सिलबट्टे को जनम दे सकती है, तो लकड़ी घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है?’
ऑन द स्पॉट निष्पक्ष न्याय
जब यह बात राजा के पास पहुंची, तो राजा ने गहन जांच करवाई और अपनी भूल सुधारते हुए रानी कालिंका और उसके पुत्र गोलू को अपनाया। बाद में गोलू चंपावत के राजा बने और गोलू दरबार लगाकर लोगों को न्याय देते थे। कहते हैं, आज के फास्ट ट्रैक कोर्ट से अधिक फास्ट थे। वे ऑन द स्पॉट निष्पक्ष निर्णय करते थी और सही और सटीक न्याय देते थे। प्रजा-प्रेम और उनकी न्यायप्रियता से वे जन-जन के राजा बन गए और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जानए लगे।
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क्या है स्टांप पर अर्जी लिखने का रहस्य
कुमाऊं क्षेत्र के लोग गोलू देवता को अपना राजा और न्याय देने वाले देवता मानते हैं। कहते हैं, जब कोई आदमी अदालत का दरवाजा खट-खटा के परेशान और निराश हो जाता है, तो वह आखिरी उम्मीद लेकर इस ‘दिव्य न्यायालय’ में हाजिरी भरता है। मान्यता है कि लोगों की लिखित अर्जी सीधी के देवता का पहुंचती है। यह अर्जी स्टांप पेपर और सादे कागज पर भी लिखी जा सकती है।
लाखों घंटियों का मंदिर
चितई गोलू देवता का मंदिर का परिसर अर्जियों और घंटियों से भरा पड़ा है, जिसे आभार और न्याय की गूंज माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही छोटी-बड़ी लाखों घंटिया देख हृदय विस्मित हो जाता है। कहते हैं, ये घंटियां उन लोगों ने अर्पित की हैं, जिनकी अर्जियां और मनोकामनाएं पूरी हो गई थी।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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