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Hindu Dharma: भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती

Bhog ke Niyam: ज्योतिषाचार्य और पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, भगवान को हमेशा शुद्ध और सात्विक चीजों का ही भोग लगाना चाहिए. व्रतराज ग्रंथ के अनुसार तय समय के बाद भोग को मंदिर से उठा लेना चाहिए. आइए जानते हैं, भोग और प्रसाद से जुड़े नियम क्या है और किन गलतियों से बचना जरूरी है.

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Bhog ke Niyam: प्रत्येक भक्त और साधक पूरी श्रद्धा और आस्था से भगवान की पूजा करता है और भोग लगाता है। भोग के रूप में भगवान शुद्ध और सात्विक चीजें, कुछ देवों को छोड़कर, अर्पित की जाती है। लेकिन हिन्दू धर्म में भोग को लेकर भी कई नियम हैं। शास्त्रों के मुताबिक, भगवान को भोग लगाने के बाद उसे एक निश्चित और सही अंतराल पर उठाना भी जरूरी होता है। इस सीमा के पार करने के बाद भोग भी नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सकता है, ऐसा व्रतराज जैसे ग्रंथों में वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं, कितनी देर में भोग लगाने के बाद प्रसाद को उठा लेना चाहिए और कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए?

भोग कितनी देर में उठाएं?

ज्योतिषाचार्य और पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि यदि भोग को लंबे समय तक या रात भर मंदिर या पूजा स्थल पर छोड़ दिया जाए, तो उसमें चांडाल या अदृश्य नकारात्मक शक्तियों को वास हो सकता है। इसलिए भगवान के भोग को कम से 5 मिनट भगवान के समक्ष अवश्य रखें और अधिकतम 15 से 20 मिनट के भीतर उस प्रसाद को अवश्य उठा लेना चाहिए और ग्रहण कर लेना चाहिए।

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न करें भोग-प्रसाद से जुड़ी ये गलतियां

देर तक या रात भाग भोग न छोड़ें – कई बार भक्त-साधक जाने-अनजाने पूजा या आरती के बाद प्रसाद को रात भर भी छोड़ देते हैं। यह गलत है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इससे प्रसाद के अमृत तत्व ‘दोषयुक्त’ हो सकते हैं, जो फलदायी नहीं रहता है।

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भोग को सीधे जमीन पर न रखें – भोग के पात्र को सीधे भूमि पर नहीं रखनी चाहिए। नियम के अनुसार, भोग को किसी थाली, स्टैन्ड और पूजा की चौकी पर ही रखना चाहिए।

गलत पात्र (बर्तन) का इस्तेमाल – पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य कहते हैं कि भगवान को एल्यूमिनीयम, कांच और प्लास्टिक आदि के पात्रों और बर्तनों में भोग नहीं लगाना चाहिए। जहां तक हो सके यह कांसा, पीतल, चांदी, तांबा और सोने के पात्रों में रखना चाहिए।

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भोग के बाद जरूर करें ये काम

  • प्रचलित मान्यता और पूजा-पाठ के नियमों के मुताबिक, जब भी भगवान को भोग लगाएं, तो उन्हें अवश्य ढक देना चाहिए। भोग के साथ जल रखना भी अनिवार्य है।
  • कुछ मिनटों के लिए मंदिर का पर्दा भी गिरा देना चाहिए, ताकि भगवान एकांत में भोग को ग्रहण कर सकें।
  • भोग उठाने के बाद उसे घर-परिवार और खानदान के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक वितरित कर देना चाहिए। प्रसाद को कभी छुपाकर नहीं रखना चाहिए।
  • यदि प्रसाद जमीन पर गिर जाए, तो उसे तुरंत उठा लेना चाहिए और उस जगह को साफ कर देना चाहिए, ताकि कि वह किसी पांव में न लगे।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Sep 08, 2026 01:10 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20+ वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है। वे स्वयं वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और एक सक्रिय ज्योतिष हैं। वे साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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