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Chanakya Niti: इन 4 बातों में संकोच करना पड़ सकता है भारी, जीवन में बढ़ सकते हैं संकट

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी जीवन की सच्चाइयों से जुड़ी हैं. वे बताते हैं कि कुछ मामलों में संकोच करना संकट को बुलावा देता है. आइए जानते हैं, चाणक्य नीति की वे 4 बातें क्या हैं, जो जीवन की दिशा बदल सकती हैं?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Dec 26, 2025 14:29
Chanakya-Niti
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Chanakya Niti: भारतीय इतिहास में आचार्य चाणक्य का नाम बुद्धि, नीति और दूरदर्शिता का प्रतीक माना जाता है. वे मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के मार्गदर्शक थे. चाणक्य केवल एक विद्वान नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन के महान शिक्षक भी थे. आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के माध्यम से जीवन, समाज, राजनीति और व्यवहार की गहरी समझ दी. उनकी बातें दिखावे पर नहीं, अनुभव और यथार्थ पर आधारित हैं. यही कारण है कि उनकी नीतियां आज भी पढ़ी जाती हैं और जीवन में अपनाई जाती हैं.

उनकी नीतियां आज भी इसलिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे सीधे जीवन की सच्चाइयों से जुड़ी हैं. चाणक्य नीति हमें सिखाती है कि कब बोलना है, कब चुप रहना है और किन बातों में संकोच करना नुकसानदायक हो सकता है. आइए जानते हैं, किन इन चार बातों में संकोच नहीं करनी चाहिए?

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धन और लेनदेन में

चाणक्य के अनुसार, धन के मामले में संकोच करना हानि पहुंचा सकता है. पैसा उधार देना हो या लेना, हिसाब साफ होना चाहिए. शर्म के कारण बात टालने से रिश्ते भी बिगड़ते हैं और नुकसान भी होता है. स्पष्ट और निडर होकर लेनदेन करना समझदारी है.

ज्ञान लेने में

ज्ञान लेने में लज्जा या उम्र का बंधन नहीं होना चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि सीखने वाला व्यक्ति कभी छोटा नहीं होता. सवाल पूछने या नई बात सीखने में झिझक जीवन की प्रगति रोक सकती है. जो सीखता रहता है, वही आगे बढ़ता है.

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भोजन और आवश्यकताओं में

भोजन जीवन की मूल आवश्यकता है. चाणक्य के अनुसार, भोजन करने या जरूरत बताने में शर्म करना गलत है. सही समय पर सही भोजन न मिले, तो शरीर और मन दोनों कमजोर हो जाते हैं. जरूरत को दबाना बुद्धिमानी नहीं है.

रिश्तेदारों से व्यवहार में

अपने रिश्तेदारों और संबंधियों से स्पष्ट और सच्चा व्यवहार रखना चाहिए. मन में बात दबाकर रखने से गलतफहमियां बढ़ती हैं. चाणक्य कहते हैं कि मधुर, साफ और सत्य व्यवहार रिश्तों को मजबूत बनाता है. संकोच यहां दूरी पैदा कर सकता है.

व्यावहारिक सीख

चाणक्य नीति का सार यही है कि जीवन में व्यावहारिक बनना जरूरी है. जहां संकोच जरूरी हो, वहां ठीक है. लेकिन जहां स्पष्टता जरूरी हो, वहां झिझक संकट बन जाती है. आचार्य चाणक्य हमें सिखाते हैं कि जीवन में सच्चाई, स्पष्टता और साहस बहुत जरूरी है. इन चार बातों में बेशर्म होना असल में समझदारी है. जो व्यक्ति संकोच छोड़कर व्यवहारिक मार्ग अपनाता है, वही जीवन की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निकल पाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Dec 26, 2025 02:29 PM

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