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Religion

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथा

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथामहिषासुर एक अजेय राक्षस था. देवी दुर्गा ने नौ दिनों के भीषण युद्ध के बाद उसका वध किया और स्वर्ग तथा तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया. आइए जानते हैं, कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध?

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Written By: Shyamnandan Updated: Mar 24, 2026 14:36
Mahishasur-Vadh

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथाहिंदू पौराणिक कथाओं में महिषासुर का नाम एक अत्यंत शक्तिशाली और मायावी राक्षस के रूप में लिया जाता है. अपनी अजेय शक्ति और रूप बदलने की क्षमता के कारण उसने स्वर्गलोक पर कब्जा कर देवताओं को भटकाया. देवताओं की असफलता और उसकी पराजय का रहस्य, दशहरा और नवरात्रि के त्योहारों में जीवित है. आइए जानते हैं, कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध?

महिषासुर कौन था?

महिषासुर असुर रंभ और एक भैंस (महिषी) का पुत्र था. जन्म के कारण वह आधा भैंस और आधा मनुष्य था. उसे इच्छा अनुसार भैंस या मनुष्य का रूप धारण करने की शक्ति प्राप्त थी. कठिन तपस्या के बाद महिषासुर को ब्रह्माजी का वरदान मिला कि उसे कोई पुरुष, चाहे देवता हो या असुर, मार नहीं सकता. इस वरदान ने उसे अजेय बना दिया.

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देवता क्यों नहीं हरा पाए?

वरदान के कारण देवताओं की सभी शक्तियां महिषासुर पर बेअसर थीं. इंद्र, विष्णु और शिव जैसे देवता भी उसे सीधे युद्ध में पराजित नहीं कर पाए. महिषासुर के अहंकार ने उसे और शक्तिशाली बना दिया. उसने स्वर्ग पर कब्जा कर देवताओं को वहां से बाहर निकाल दिया. पुरुषों की शक्ति से वह कभी पराजित नहीं हो सकता था.

देवी दुर्गा का सृजन

देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों को मिलाया और देवी दुर्गा का सृजन किया. ब्रह्मा, विष्णु और शिव की सामूहिक ऊर्जा से उत्पन्न देवी दुर्गा को महिषासुर का वध करने के लिए बनाया गया. देवी दुर्गा का जन्म शक्ति और न्याय की प्रतीक के रूप में हुआ. उनका उद्देश्य महिषासुर को परास्त करना और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराना था.

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महिषासुर और देवी दुर्गा का युद्ध

महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच युद्ध पूरे नौ दिनों तक चला. प्रत्येक दिन देवी ने अपने विभिन्न शस्त्रों और अद्भुत शक्तियों का प्रयोग किया. महिषासुर ने भी रूप बदलकर देवी को चुनौती दी. कभी भैंस बनकर हमला किया, कभी मनुष्य का रूप धारण किया.

देवी दुर्गा ने ऐसे किया महिषासुर का वध

युद्ध के दसवें दिन, जिसे विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है, देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया. देवी ने अपने त्रिशूल से उसके भैंस रूप को घायल किया और अंत में उसका सिर काटकर बुराई पर अच्छाई की विजय सुनिश्चित की. इस दिन से दशहरा उत्सव की परंपरा शुरू हुई.

देवी दुर्गा कैसे बनी महिषासुरमर्दिनी?

महिषासुर के वध के बाद देवी दुर्गा को ‘महिषासुरमर्दिनी’ कहा गया. इसका अर्थ है- महिषासुर को मारने वाली. उनका यह रूप शक्ति, साहस और न्याय का प्रतीक बन गया. देवी दुर्गा का यह रूप सभी में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को दर्शाता है.

महिषासुर वध कथा की सीख

महिषासुर का वध यह दर्शाता है कि अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग अंततः पराजय की ओर ले जाता है. देवी दुर्गा की भूमिका न्याय और धर्म के महत्व को प्रतिपादित करती है. नवरात्रि और दशहरा के त्योहार इस कथा की स्मृति और अच्छाई की विजय का उत्सव हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 24, 2026 02:36 PM

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