---विज्ञापन---

Religion angle-right

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथा

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथामहिषासुर एक अजेय राक्षस था. देवी दुर्गा ने नौ दिनों के भीषण युद्ध के बाद उसका वध किया और स्वर्ग तथा तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया. आइए जानते हैं, कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध?

---विज्ञापन---

Mahishasur Vadh Katha: कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध, जानें कथाहिंदू पौराणिक कथाओं में महिषासुर का नाम एक अत्यंत शक्तिशाली और मायावी राक्षस के रूप में लिया जाता है. अपनी अजेय शक्ति और रूप बदलने की क्षमता के कारण उसने स्वर्गलोक पर कब्जा कर देवताओं को भटकाया. देवताओं की असफलता और उसकी पराजय का रहस्य, दशहरा और नवरात्रि के त्योहारों में जीवित है. आइए जानते हैं, कौन था महिषासुर, क्यों नहीं हरा पाए देवता, देवी दुर्गा ने कैसे किया वध?

महिषासुर कौन था?

महिषासुर असुर रंभ और एक भैंस (महिषी) का पुत्र था. जन्म के कारण वह आधा भैंस और आधा मनुष्य था. उसे इच्छा अनुसार भैंस या मनुष्य का रूप धारण करने की शक्ति प्राप्त थी. कठिन तपस्या के बाद महिषासुर को ब्रह्माजी का वरदान मिला कि उसे कोई पुरुष, चाहे देवता हो या असुर, मार नहीं सकता. इस वरदान ने उसे अजेय बना दिया.

---विज्ञापन---

देवता क्यों नहीं हरा पाए?

वरदान के कारण देवताओं की सभी शक्तियां महिषासुर पर बेअसर थीं. इंद्र, विष्णु और शिव जैसे देवता भी उसे सीधे युद्ध में पराजित नहीं कर पाए. महिषासुर के अहंकार ने उसे और शक्तिशाली बना दिया. उसने स्वर्ग पर कब्जा कर देवताओं को वहां से बाहर निकाल दिया. पुरुषों की शक्ति से वह कभी पराजित नहीं हो सकता था.

देवी दुर्गा का सृजन

देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों को मिलाया और देवी दुर्गा का सृजन किया. ब्रह्मा, विष्णु और शिव की सामूहिक ऊर्जा से उत्पन्न देवी दुर्गा को महिषासुर का वध करने के लिए बनाया गया. देवी दुर्गा का जन्म शक्ति और न्याय की प्रतीक के रूप में हुआ. उनका उद्देश्य महिषासुर को परास्त करना और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराना था.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Premanand Maharaj Updesh: तीर्थयात्रा में ‘पीरियड’ आज जाए तो दर्शन करें या नहीं, जानिए क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज

महिषासुर और देवी दुर्गा का युद्ध

महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच युद्ध पूरे नौ दिनों तक चला. प्रत्येक दिन देवी ने अपने विभिन्न शस्त्रों और अद्भुत शक्तियों का प्रयोग किया. महिषासुर ने भी रूप बदलकर देवी को चुनौती दी. कभी भैंस बनकर हमला किया, कभी मनुष्य का रूप धारण किया.

---विज्ञापन---

देवी दुर्गा ने ऐसे किया महिषासुर का वध

युद्ध के दसवें दिन, जिसे विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है, देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया. देवी ने अपने त्रिशूल से उसके भैंस रूप को घायल किया और अंत में उसका सिर काटकर बुराई पर अच्छाई की विजय सुनिश्चित की. इस दिन से दशहरा उत्सव की परंपरा शुरू हुई.

देवी दुर्गा कैसे बनी महिषासुरमर्दिनी?

महिषासुर के वध के बाद देवी दुर्गा को ‘महिषासुरमर्दिनी’ कहा गया. इसका अर्थ है- महिषासुर को मारने वाली. उनका यह रूप शक्ति, साहस और न्याय का प्रतीक बन गया. देवी दुर्गा का यह रूप सभी में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को दर्शाता है.

---विज्ञापन---

महिषासुर वध कथा की सीख

महिषासुर का वध यह दर्शाता है कि अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग अंततः पराजय की ओर ले जाता है. देवी दुर्गा की भूमिका न्याय और धर्म के महत्व को प्रतिपादित करती है. नवरात्रि और दशहरा के त्योहार इस कथा की स्मृति और अच्छाई की विजय का उत्सव हैं.

यह भी पढ़ें: Numerology Personality Traits: सिंगर अरिजीत सिंह का है न्यूमेरोलॉजी के सबसे रहस्यमय मूलांक से नाता, जानिए कैसे होते ये लोग

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 24, 2026 02:36 PM

End of Article

About the Author

Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 𝕀𝕟 ~ LinkedIn:
https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 𝕏 ~ Twitter/X: @Shyamnandan_K 𝔽 ~ facebook: https://www.facebook.com/shyamnandank73

Read More

Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 𝕀𝕟 ~ LinkedIn:
https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 𝕏 ~ Twitter/X: @Shyamnandan_K 𝔽 ~ facebook: https://www.facebook.com/shyamnandank73

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola