सोशल मीडिया के इस खतरनाक चैलेंज ने ली 9 साल की बच्ची की जान, कहीं आपका बच्चा तो नहीं देख रहा ये ट्रेंड?

एक वायरल वीडियो…और कुछ ही मिनटों में सब खत्म! 9 साल की बच्ची ने मजाक समझकर ऐसा चैलेंज किया, जिसने उसकी जान ले ली. आखिर क्या है ये खतरनाक ट्रेंड, जिससे हर पैरेंट को सतर्क रहने की जरूरत है?

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जानलेवा बना सोशल मीडिया ट्रेंड.

Dangerous Social Media Challenge: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कुछ चैलेंज मजाक नहीं, जानलेवा भी साबित हो सकते हैं. टेक्सास की एक 9 साल की बच्ची की मौत ने इस खतरे को फिर से सामने ला दिया है. मासूम जिज्ञासा और एक वीडियो की नकल ने एक खुशहाल परिवार की दुनिया उजाड़ दी. यह घटना हर माता-पिता के लिए चेतावनी है कि बच्चों की ऑनलाइन दुनिया पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

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खतरनाक चैलेंज ने ली जान

टेक्सास के एक परिवार की 9 साल की बेटी, जैकलिन के ब्लैकवेल, की मौत एक सोशल मीडिया चैलेंज में हिस्सा लेने के दौरान हो गई. यह ब्लैकआउट या चोकिंग चैलेंज कहलाता है, जिसमें बच्चे सांस रोकने की कोशिश करते हैं, जब तक वे बेहोश न हो जाएं. इसी खतरनाक कोशिश में उसकी जान चली गई.

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वीडियो देखकर आया था आइडिया

बच्ची ने यह चैलेंज सोशल मीडिया पर देखा था. उसने अपनी दादी को भी यह वीडियो दिखाया था, जिन्होंने उसे ऐसा कभी न करने की सलाह दी थी. लेकिन बच्चों की जिज्ञासा कई बार उन्हें जोखिम भरे कदम उठाने पर मजबूर कर देती है.

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खामोशी ने खड़ा किया शक

घटना वाले दिन सुबह बच्ची स्कूल जाने से पहले घर के बाहर खेलने गई थी. उसके पिता को अचानक अजीब सी खामोशी महसूस हुई. जब उन्होंने जाकर देखा, तो बेटी बेहोश हालत में मिली. पिता कहना है कि वह पल उनकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव था. उन्होंने तुरंत बच्ची को बचाने की कोशिश की, उसे रस्सी से हटाया और CPR भी दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. यह हादसा उनके लिए एक ऐसा सदमा बन गया, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएंगे.

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कैसे रखें बच्चों का ध्यान

  • आज के जमाने में बच्चो को मोबाइल से दूर रखना आसान नहीं है. लेकिन उन पर नजर रखी जा सकती है ये देखा जा सकता है कि वो फोन में क्या कर रहे हैं और किस तरह का कंटेट कन्ज्यूम कर रहे हैं.
  • इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि बच्चों के साथ खुला संवाद और समय पर निगरानी कितनी जरूरी है. बच्चों को डराने के बजाय उनसे बात करें, उनके व्यवहार को समझें 
  • बच्चों की आपनी प्राइवेट होती है. लेकिन अगर बच्चा बहुत ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है और उसके व्यवहार में भी बदलाव है तो उसके फोन की जांच करें.

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है. अगर थोड़ी सी सतर्कता बरती जाए, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है. 

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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