Mahatara Jayanti 2026: महातारा जयंती कब है, जानें सटीक तारीख; इन दो शक्तिपीठ में उमड़ेगी अपार भीड़

Mahatara Jayanti 2026: चैत्र नवरात्रि के बीच महातारा जयंती का खास पर्व नजदीक है, जिसे तंत्र साधना और देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार तिथि और संयोग इसे और खास बना रहे हैं. जानिए, कब है यह पर्व और किन दो शक्तिपीठों में उमड़ेगी अपार भीड़?

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Mahatara Jayanti 2026: चैत्र नवरात्रि के बीच शक्ति उपासना से जुड़ा एक बेहद खास पर्व तेजी से नजदीक आ रहा है. यह पर्व है महातारा जयंती, जिसे तंत्र साधना और देवी उपासना का विशेष दिन माना जाता है. इस बार इसकी तिथि और संयोग इसे और भी खास बना रहे हैं, जिससे देशभर के शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. आइए जानते हैं, महातारा जयंती कब है और किन दो खास शक्तिपीठ में अपार जन सैलाब उमड़ेगा?

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कब है महातारा जयंती 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष महातारा जयंती गुरुवार 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. यह दिन चैत्र शुक्ल नवमी का होता है, जिसे राम नवमी के रूप में भी मनाया जाता है. एक ही दिन दो महत्वपूर्ण पर्वों का संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है. गुरुवार का दिन ज्ञान और गुरु कृपा का प्रतीक माना जाता है, जिससे इस बार का योग और प्रभावशाली बन गया है.

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कौन हैं मां तारा?

मां तारा को दस महाविद्याओं में दूसरी प्रमुख शक्ति माना जाता है. उन्हें ‘तारिणी’ कहा जाता है यानी वह देवी जो जीवन के संकटों से पार लगाती हैं. उनका स्वरूप मां काली के समान माना जाता है, लेकिन उनकी साधना का केंद्र मोक्ष और वाणी की सिद्धि है. मान्यता है कि उन्होंने भगवान शिव को विष के प्रभाव से राहत दी थी, इसलिए उन्हें करुणामयी माता के रूप में भी पूजा जाता है.

बंगाल के तारापीठ में विशेष तैयारियां

पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में स्थित तारापीठ को मां तारा का प्रमुख और सिद्ध स्थान माना जाता है. द्वारका नदी के किनारे बसे इस मंदिर में सालभर साधकों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन जयंती के दिन यहां अलग ही माहौल होता है.

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यहां सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. तांत्रिक साधना, विशेष पूजा और रात्रि अनुष्ठान यहां की खास पहचान है. कई साधक गुप्त साधनाएं भी करते हैं, जो आम लोगों के लिए आकर्षण का विषय होती हैं. स्थानीय प्रशासन भीड़ को संभालने के लिए विशेष व्यवस्था करता है.

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बिहार के उग्रतारा स्थान में लगेगा मेला

बिहार के सहरसा जिले के महिषी गांव में स्थित उग्रतारा शक्तिपीठ भी इस दिन आस्था का प्रमुख केंद्र बनता है. मान्यता है कि यहां देवी सती की बाईं आंख गिरी थी, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है.

महातारा जयंती पर यहां भव्य मेला लगता है. दूर-दराज से श्रद्धालु और साधक पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में विशेष पूजा, हवन और तांत्रिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. स्थानीय लोगों के लिए यह धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव भी बन जाता है.

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इस दिन पूजा का है विशेष महत्व

इस दिन मां तारा की उपासना से शत्रु बाधा दूर होने और आर्थिक समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है. साधक विशेष मंत्रों का जाप करते हैं और नीले पुष्प अर्पित करते हैं. तंत्र परंपरा से जुड़े लोगों के लिए यह दिन साधना सिद्धि का अवसर माना जाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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