कन्या पूजन से हल होंगी सभी समस्याएं, बस कर लें ये 6 उपाय!

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। माना जाता है कि कन्या पूजन से जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं का अंत हो जाता है। आइए जानते हैं कि कन्या पूजन के दौरान कौन से उपाय करने से लाभ होता है।

navratri kanya pujan
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नवरात्रि में अष्टमी या नवमी को लोग कन्या पूजन करते हैं। इसमें लोग 2 से लेकर 10 साल तक की कन्याओं को भोजन कराते हैं। साल 2025 में चैत्र नवरात्रि में 5 अप्रैल को अष्टमी और 6 अप्रैल को नवमी तिथि पड़ रही है। जो लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं वे कन्या पूजन करके ही व्रत खोलते हैं।

मान्यता है कि कन्या पूजन से घर में सुख, शांति और संपन्नता आती है। कन्या भोज के दौरान नौ कन्याओं का होना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही एक बालक का भी होना अच्छा माना जाता है। कन्याओं को जो भी भोग परोसे उसको सबसे पहले देवी को अर्पित करें।

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ऐसे करें कन्या पूजन

कन्या पूजन करने के लिए सबसे पहले कन्याओं के पैर धुलाएं। इसके बाद उनको आसन पर विराजमान करें। उनके माथे पर तिलक और अक्षत लगाएं। इसके साथ ही उनको प्रसाद में हलवा, पूड़ी, चने और खीर खिलाएं। कन्याओं को दान , धन, वस्त्र या कोई उपयोगी वस्तु दें और उनके पैर छूकर गलतियां की क्षमा मांगते हुए उनको घर से विदा करें।

कर सकते हैं ये उपाय

समस्याओं के अनुसार आप कुछ आसान से उपाय कर सकते हैं।

विवाह में देरी – अगर विवाह में देरी हो रही हो तो पांच साल की कन्या को भोजन कराकर उसे श्रृंगार का सामान भेंट करें।

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धन संबंधी समस्या- धन की कमी से परेशान हैं तो चार साल की कन्या को खीर खिलाएं। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र और दक्षिणा दें।

काम में रुकावट- अगर काम में रुकावटें आ रही हैं तो नौ साल की तीन कन्याओं को भोजन की सामग्री और कपड़े दान में दें।

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पारिवारिक क्लेश- घर में क्लेश रहता है तो तीन और 10 साल की कन्याओं को मिठाई खिलाएं।

बेरोजगारी- अगर आप बेरोजगारी से परेशान हैं तो 6 साल की कन्या को छाता और कपड़े भेंट करें।

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सभी समस्याओं का होगा निवारण

हर प्रकार की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए 10 साल तक की कन्याओं को भोजन सामग्री, दूध, पानी और फलों का रस भेंट करें। इसके साथ ही उन्हें ब्यूटी प्रोडक्ट भी भेंट करें।

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हर आयु की कन्या का होता है अलग महत्व

  • 2 साल की कन्या को कौमारी कहा जाता है। इनकी पूजा से दुख और दरिद्रता का नाश होता है।
  • 3 साल की कन्या को त्रिमूर्ति कहा जाता है और इनके पूजन से धन-धान्य की कमी दूर होती है।
  • 4 साल की कन्या को कल्याणी कहा जाता है। इनके पूजन से सुख और समृद्धि आती है।
  • 5 साल की कन्या को रोहिणी कहा गया है। इनके पूजन से रोग मुक्ति मिलती है।
  • 6 साल की कन्या को कालिका माना गया है। इनके पूजन से विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है।
  • 7 साल की कन्या को चंडिका कहा जाता है। इनके पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।
  • 8 साल की कन्या को शांभवी कहा जाता है। इनकी पूजा से प्रसिद्धि प्राप्त होती है।
  • 9 साल की कन्या को दुर्गा कहा गया है। इनके पूजन से शत्रु विजय और असाध्य कार्यों की सिद्धि प्राप्त होती है।
  • 10 साल की कन्या सुभद्रा होती है। सुभद्रा के पूजन से सारे मनोरथ पूरे होते हैं और सुख प्राप्त होता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Mohit Tiwari

Mohit Tiwari

मोहित 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सालों में इन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इनको फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क के साथ ही चैनल, प्रिंट और डिजिटल माध्यम में काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही Astroyogi  व अन्य एस्ट्रोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम कर चुके हैं। इन्होंने एस्ट्रोलॉजी का गहन अध्ययन किया हुआ है। इसके चलते पुराणों और शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश भी अपने आर्टिकल्स के माध्यम से करते हैं। धर्म के साथ ही लाइफस्टाइल के भी जटिल विषयों को सरलता से पाठकों के समक्ष रखते हैं। अब News 24 के साथ जुड़कर फीचर लेखन का कार्य कर रहे हैं।
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